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10 की जान बचा चुके हैं गोताखोर तख्त सिंह

Wed, 17 Aug 2016 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गोताखोर - फोटो : अमर उजाला
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रेवाड़ी जिले में कहीं भी पानी में कोई हादसा हो जाए तो पूरे जिले में सभी की जबान पर बस एक ही नाम आता है तख्त सिंह। 32 वर्षीय जिले के एकमात्र गोताखोर तख्तसिंह 16 साल से गोताखोरी कर रहे हैं। अभी तक करीब 10 लोगों की जान बचा चुके तख्त सिंह को प्रशासन की ओर से कई बार सम्मानित किया जा चुका है। इस बार भी स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित जिला स्तरीय समारोह में तख्त सिंह को सम्मानित किया गया। मूलरूप से फितेड़ी गांव निवासी तख्तसिंह 11 तक पढ़े हैं। बचपन से तैराकी के शौकीन तख्तसिंह को पानी में नए-नए करतब करने का शौक रहा। पूरा गांव बचपन से ही इनकी इस कला का मुरीद रहा है।

10 साल पहले बढ़ा झुकाव
तख्तसिंह ने बताया कि करीब दस साल पहले वह रेवाड़ी से अपने गांव आ रहे थे। पुलिस लाइन के समीप वाली नहर में एक बच्चा डूब रहा था। उसके साथ दो लड़के और भी थे। दोनेां की उसकी बाइक रुकवाकर मदद की गुहार की। उसके बाद तख्त सिंह बिना कुछ सोच-समझे नहर में कूद गए और बच्चे को बचा लिया। इस बाद पूरे गांव ने तख्तसिंह की भरी-पूरी प्रशंसा की। इसी के बाद से वे इसी काम में जुट गए। अब जिलेे में जहां भी जरूरत होती होती है तो उन्हें बुलाया जाता है।
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बिना ऑक्सीजन कूद जाते हैं पानी में
अन्य गोताखोर तो ऑक्सीजन सिलेंडर, वाटरप्रूफ कपड़े एवं जूते पहनकर पानी में कूदते हैं। लेकिन तख्त सिंह बिना किसी मदद के सीधे ही पानी में कूद जाते हैं। तख्त सिंह का स्टेमना करीब 12 घंटे तक पानी में गुजारने का है।

बचाई 10 जानें
अभी तख्तसिंह ने जिले में 10 लोगों की जान बचाई हैं। इसके अतिरिक्त कई शव भी पानी से निकाले हैं। कई बार तो प्रशासन रात के समय तख्त सिंह को मदद के लिए बुलाता हैं। लेकिन तख्त सिंह बिना किसी स्वार्थ और लालच के एक बुलावे पर सीधे पहुंच जाते हैैं।
फरवरी में आरएसएस से जुड़े ओमप्रकाश राजपाल का बेटा दिल्ली रोड स्थित जेएलएन नहर में डूब गया था। शाम तक भी शव नहीं मिलने पर प्रशासन ने तख्तसिंह को बुलाया। इस पर तख्तसिंह ने रात करीब 10 बजे कड़कड़ाती ठंड में दो घंटे की मेहनत के बाद शव को नहर से बाहर निकाला। इसी को लेक तख्तसिह को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया।
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अभी भी बेरोजगारी से जूझ रहा तख्त सिंह
तख्त सिंह ने यूं तो सभी लोगों की हरसंभव मदद की। कई जानें बचाई। लेकिन अभी तक कुछ नहीं मांगा। हमेशा नि:स्वार्थ भाव से सेवा की। लेकिन तख्तसिंह का कहना है कि वह बेरोजगार है। उसकी दो बेटियां हैं। अगर उसे कुछ हो जाता है, तो इन दोनों मासूमों का क्या होगा। ऐसे में तख्तसिंह से प्रशासन से उसे कुछ रोजगार मुहैया कराने की भी मांग की है।
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