जल युद्ध आंदोलन के नायक रघु यादव ने कहा कि जिस पानी के लिए 27 साल पहले विधानसभा से इस्तीफा दिया था, आज उसका मुझे प्रतिफल मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के नतीजे के बाद अब दक्षिणी हरियाणा सहित पूरे हरियाणा को एसवाईएल का पानी मिलेगा। इससे पानी की समस्या से जूझ रही दक्षिणी हरियाणा की धरती खुशहाल होगी।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में रघु यादव ने कहा कि 1989 में देवीलाल की सरकार के दौरान व्यास नदी से मिल रहे पानी के कुछ अंश को पश्चिम हरियाणा में मोड़ दिया गया जबकि दक्षिण हरियाणा के जोहड़ और नलकूप सूख चुके थे। पानी के निश्चित बंटवारे के लिए उन्होंने आवाज उठाई। इस खिलाफत की वजह से उन्हें सरकार के विधायक दल से निष्काषित कर दिया। दक्षिण हरियाणा में पानी के मुद्दे का हल निकालने के लिए उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से ही इस्तीफा दे दिया था। उस समय लोगों ने काफी उपहास किया लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट के नतीजे के बाद मन को तसल्ली हुई है।
जलाया था जलयुद्ध
विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को उनके हक के पानी के लिए सचेत किया। कई पदयात्राएं निकालीं। सबसे पहले दो अक्तूबर 1992 को नारनौल में धरना दिया 11 अक्तूबर को रेवाड़ी में धरना दिया। इसी मुद्दे को लेेकर 10 अगस्त 1993 को नारनौल में सभा की गई। सभा का मुद्दा पानी का हिसाब, हक और हिस्सा था। इस सभा में लाठी और गोली चली। इसमें दो लोगों की मौत भी हो गई जबकि 17 लोग घायल हुए। वे स्वयं भी बुरी तरह घायल हुए थे। एक माह तक रोहतक अस्पताल में भर्ती भी रहे। इस दौरान उन्हें भी मरा मान लिया गया था। उन्होंने बताया कि अभी तक दक्षिण हरियाणा की नहरों में आने वाले पानी से लोगों के कंठ भी नहीं भीख पाते। खेती को दूर की बात है। एसवाईएल के लिए तैयार की गई नहरें सूखी पड़ी हैं। नहरों के बनने के बाद से अभी तक इनमें बूंद भी पानी नहीं आया। एसवाईएल का सर्वाधिक लाभ दक्षिण हरियाणा को ही होना है।