रेवाड़ी के राव तुलाराम स्टेडियम को सैंडा ट्रैक की मंजूरी मिलने के बाद खिलाड़ियों को सिंथेटिक ट्रैक भी जल्द ही मिलने की उम्मीद है। हालांकि जिला खेल विभाग की तरफ से आला अधिकारियों को सिंथेटिक ट्रैक की डिमांड का प्रपोजल भेजा है। सैंडा ट्रैक के लिए खेल विभाग ने 38.50 लाख रुपये पास कर दिए हैं लेकिन प्रशिक्षकों और धावकों की मानें तो सैंडा ट्रैक बनने से धावकों को राहत मिलेगी। इसमें राख का प्रयोग होता है। वर्तमान में ट्रैक की कड़क सतह पर खिलाड़ियों को दौड़ना पड़ता है। इसके चलते कई बार खिलाड़ियों के पांवों में कंकर-पत्थर चुभने और चोटिल होने का अंदेशा लगा रहता है। कुछ ही महीनों में सैंडा ट्रैक के बनते ही खिलाड़ियों की यह समस्या समाप्त हो जाएगी। अब खिलाड़ियों की चाहत है कि जल्द से जल्द उन्हें सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ने का मौका मिले और वे आसानी से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की तैयारी कर सकें।
नेशनल मीट में सिंथेटिक ट्रैक
राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर की दौड़ स्पर्धाओं में खिलाड़ी सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ते हैं। ऐसे में इस ट्रैक के मिल जाने से प्रशिक्षक खिलाड़ियों को और भी बारीकि से नेशनल-इंटरनेशनल मीट की प्रैक्टिस करा सकते हैं। विभाग अधिकारियों की मानें तो इस ट्रैक के निर्माण में 5 से 6 करोड़ रुपये का खर्चा आता है। हालांकि प्रदेश सरकार इस पर विचार कर रही है। लेकिन फिलहाल प्रदेशभर के खेल मैदानों में स्थिति यह है कि वहां अभी तक सैंडा ट्रैक ही नहीं बने है।
सिंथेटिक ट्रैक के यह लाभ
सिंथेटिक से बना पूरा रेसिंग ट्रैक में रनिंग के अलावा जंपिंग, फ्लाइंग सहित अन्य एक्टिविटी की भी की जा सकती है। वहीं इस ट्रैक पर खिलाड़ियों को अलग स्पाइक्स के साथ दौड़ने का अलग अनुभव मिलता है। इसके अलावा रेसर्स की स्पीड, टाइमिंग आदि चीजों पर भी इजी वर्क एंड डेवलपमेंट किया जा सकता है।
15 से अधिक खिलाड़ी राज्य-राष्ट्रीय स्तरीय
बिना सैंडा और सिंथेटिक ट्रैक के रावतुलाराम स्टेडियम से 15 से अधिक धावकों ने प्रशिक्षक अनिल कुमार के प्रशिक्षण में राज्य-राष्ट्रीय स्तर तक सराहनीय प्रदर्शन किया है और जिले के नाम मेडल दिए हैं। इनमें अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हर्ष, नेशनल चैंपियन रुबिना, ज्योत्सना आदि नाम प्रमुख हैं।
सिंथेटिक ट्रैक के संदर्भ में भी हम उच्चाधिकारियों को लिख चुके हैं। उम्मीद है आने वाले समय में जल्द ही हमारे खिलाड़ी सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ेंगे। अच्छी बात यह है कि सैंडा ट्रैक के निर्माण से भी धावकों को काफी सुविधा होगी। इसके लिए 38.50 लाख रुपये पास हो चुुके हैं। वहीं हम जिले के पांचों राजीव गांधी खेल परिसरों में भी सैंडा ट्रैक बनवाने का प्लान कर रहे हैं। - भारत ग्रोवर, डीएसओ, रेवाड़ी