रेवाड़ी जिले की कुल आबादी का 30 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से नशे की गिरफ्त में हैं। वहीं कुल नशेड़ियों की संख्या में 70 फीसदी नशेड़ी युवा वर्ग है। नशे के चंगुल में फंसता देश का भविष्य सर्वांगीण विकास में बड़ी बाधा है। नशा मुक्ति केंद्र की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले की लगभग 10 लाख की आबादी में 3.30 लाख लोग विभिन्न तरह के नशे व मादक पदार्थों के आदी हैं। शराब, चरस-गांजा, कैप्सूल, बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू आदि नशे की लत तेजी से किशोर और युवा वर्ग में फैल रही है। शहर की कई मुख्य जगहों पर सूखे नशे के साथ अन्य ड्रग आइटमों का व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है। चर्चाएं आम है कि शराब और चरस-गांजा की बिक्री के ठिकानों पर पुलिस की कार्रवाई भी दिखावटी होती है।
यूं चलता है सूखे नशे का कारोबार
सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय राजमार्गों से सूखे नशे का कारोबार शुरू होता है। सूखे नशा अर्थात चरस-गांजा, अफीम, चूरा पोस्त के स्मगलर बाइक पर सवार होकर नेशनल हाइवे पर बने अस्थाई चाय के खोखे, ढाबे व होटलों पर माल सप्लाई करते हैं। इसके बाद यह माल दैनिक सफर करने वाले कुछ विशेष लोगों के माध्यम से शहर व गांवों की अलग-अलग दुकानों पर पहुंचता है। जिसके बाद नशा गली-मोहल्ले के युवाओं तक पहुंचता है। ये चेन दैनिक रूप से चलती है।
हर माह औसतन 70 नशेडिय़ों का इलाज
सर्कुलर रोड स्थित नशा मुक्ति केंद्र में हर महीने औसतन 70 नशेड़ियों को परामर्श और इलाज दिया जाता है। यहां के कर्मचारियों का कहना है कि समय के साथ नशेड़ियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इस वर्ष कुल 800 से अधिक हेवी ड्रग एडिक्टिड लोगों को उपचार लेकर नशा मुक्त किया गया है। प्रोग्राम मैनेजर महेश कुमार की माने तो यहां उपचार के लिए आने वाले नशेड़ियों में लगभग 60 प्रतिशत लोग शराब के आदि हैं। हर माह औसतन 45 केस शराब के, 6 केस चरस-गांजा व 18 लोग बीड़ी-सिगरेट, गुटखा-तंबाकू से पीड़ित हैं।
अंधेरी गलियों और पार्कों में पनप रहा नशा
चौदह वर्ष के किशोर से लेकर 21 साल के वयस्क तक शहर की अंधेरी गलियों और पार्कों के कोने में नशा करने में चूर हैं। अभिभावकों और अपने संबंधियों की नजरों से दूर इन जगहों पर स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र व अन्य बच्चे नशे में अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। रात के समय पुलिस गश्त से ऐसी कई टोलियों को नशा करते पकड़ा है तथा कार्रवाई की है। लेकिन नशे की धुन युवाओं में सिवाय तलब जगाने और जीवन समाप्त करने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।
अवैध शराब व शराबियों के खिलाफ 240 मुकदमे दर्ज
वर्ष 2016 में पुलिस ने अभी तक जिले भर में अवैध शराब बिक्री और शराब पीकर हुड़दंग करने वाले लोगों के खिलाफ 241 मुकदमे दर्ज किए हैं। वहीं 11 मुकदमे एनडीपीए के दर्ज किए हैं, जिसमें लगभग 12 किलो से अधिक हैवी ड्रग्स पकड़े गए हैं। इनमें भांग पत्ती, चूरा पोस्त, चरस-गांजा आदि नशे शामिल हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जिले में शराब पिलाने और पीने का काम किस तेजी से चल रहा है।
ज्यादातर शराब का नशा करने वाले
नशेड़ियों में शराब का नशा करने वालों की संख्या अधिक है। हमारे पास 16 साल से 60 साल तक शराब संबंधी केस सर्वाधिक आते हैं। दुख की बात यह है कि हमारे कई युवाओं की जिंदगी उस उम्र में समाप्त हो गई, जब उन्हें अपने मां-बाप के लिए कुछ करना चाहिए था।
महेश कुमार यादव, प्रोग्राम मैनेजर, नशा मुक्ति केंद्र
नशेड़ियों के खिलाफ चलता रहता है अभियान
पुलिस प्रशासन की ओर से अवैध शराब बिक्री व अन्य ड्रग बेचने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। वहीं पार्कों व अन्य जगहों पर छुप कर ड्रग का नशा कर रहे लोगों पर कार्रवाई को लेकर पुलिस सख्त है। पीसीआर वैन रात्रि के समय गश्त कर ऐसे नशेड़ियों को पकड़ती है तथा कार्रवाई के साथ नशे से दूर रहने का भी पाठ पढ़ाती है।
प्रवीण कुमार, पीआरओ, जिला पुलिस