फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नागरिक अस्पताल को खुद इलाज की दरकार

Mon, 22 Aug 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
doctor
विज्ञापन

विज्ञापन
रेवाड़ी जिले के नागरिक अस्पताल में सुविधाओं एवं स्टाफ के अभाव कमी का खामियाजा यहां उपचार कराने आने वाले मरीजों एवं उनके साथ आने वाले परिजनों को उठाना पड़ रहा है। प्रतिदिन एक हजार से अधिक ओपीडी के बावजूद अस्पताल में ना तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और ना ही बिजली की। ऐसे में अस्पताल में आने वाले तीमारदारों को हाथों में पानी की बोतल एवं पंखा लाना पड़ता है। अस्पताल में स्टाफ नर्सों की 57 पोस्ट सेंक्संड हैं, इनमें से भी महज 15 स्टाफ नर्स ही काम कर रही हैं। यही गायनी वार्ड मेें प्रतिदिन बीस से ज्यादा डिलीवरी होती है, लेकिन यहां पर एक विशेषज्ञ महिला डॉक्टर पर ही इसकी जिम्मेदारी है। अस्पताल में आलम इतना खराब है कि यहां कई जगह तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक नहीं है।

प्रतिदिन हाथापाई की नौबत
नागरिक अस्पताल में सर्वाधिक खराब स्थित  यहां के अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे एवं ब्लड जांच केंद्र की है। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण यहां स्टाफ के आए दिन झगड़े होते रहते हैं। कई बार तो हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर लिख तो देते हैं, लेकिन छोटी मशीन के कारण सात-सात दिन तक की वेटिंग चलती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चे की जान तक को खतरा हो सकता है। यहां कार्य कर रहे रेडियोलोजिस्ट का कहना है कि प्रतिदिन पांच सौ तक एक्स-रे डॉक्टरों द्वारा लिखे जाते हैं। जिले चार रेडियोलोजिस्ट की बजाए यहां पर दो रेडियोलोजिस्ट होने के कारण दिन में एक दिन में केवल 100-120 तक एक्स-रे रिपोर्ट ही दी जाती है। इसके चलते यहां पर भी रोगियों को आगे की दिन तक की डेट दी जा रही है। ब्लड जांच के लिए भी नागरिक अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहती हैं।
विज्ञापन


गायनी वार्ड का भी हाल बेहाल
नागरिक अस्पताल में सबसे अधिक दवाब गायनी वार्ड में रहता है। यहां पर पूरे समय सैंकड़ों महिलाएं उपचार के लिए बैठी रहती हैं। लेकिन स्टाफ नर्स की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को टीके लगवाने तक के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। गायनी डिपार्टमेंट में चार विशेषज्ञ महिला डाक्टरों की पोस्ट प्रस्तावित हैं। लेकिन दो डॉक्टरों द्वारा रिजाइन देने एवं एक डॉक्टर के छुट्टी पर जाने के चलते एक गायकोनोलोजिस्ट पर ही पूरे अस्पताल का भार है। वहीं एनएचएम स्कीम के तहत छंटनी के बाद स्टाफ नर्स की और ज्यादा समस्या खड़ी हो गई है। हटाई गई चार स्टाफ नर्सों में से प्रशासन  केवल दो नर्सों को दोबारा ज्वाइन कराया है, जबकि दो अभी भी बुलावे का इंतजार कर रही हैं।
विज्ञापन


स्वास्थ्य मंत्री ने खाली पोस्ट के प्रपोजल मांगे थे। हमने यहां से बनाकर भेज दिए हैं। अस्पताल में स्टाफ नर्स एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ अन्य सुविधाओं को पूरा करने के लिए सरकार एवं अस्पताल प्रशासन पूरे समर्पण के साथ काम कर रहा है। आशा है कि जल्द ही स्टॉफ के साथ अन्य सुविधाओं को पूरा कर लिया जाएगा।
डॉ. पुष्पा बिश्रोई, सीएमओ नागरिक अस्पताल, रेवाड़ी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें