जिले में उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए शनिवार को उपभोक्ता दिवस मनाया गया। सरकारी निष्क्रियता का आलम यह है कि एक साल में करीब 14 शिकायतें मिलने के बावजूद नापतौल विभाग एक पर भी कार्रवाई नहीं कर पाया। शहर के सिनेमा घरों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के साथ अन्य सार्वजनिक जगहों पर धड़ल्ले से वस्तुओं पर अंकित मूल्य से ज्यादा रेट वसूले जाने से खुलेआम उपभोक्ताओं की जेब कट रही है। विभाग का अपना बचाव करते हुए कहना है कि शिकायतकर्ता और संबंधित दुकानदार में समझौता हो जाने और संबंधित आइटम का बिल पेश नहीं कर पाने से कोई कार्रवाई नहीं कर पाते। इस बारे में लोगों का कहना है कि साल में एक भी कार्रवाई नहीं होने से विभाग की निष्क्रियता सामने आती है। कोमोडिटी एक्ट (वस्तु अधिनियम) की पालना के लिए सरकार की तरफ से नापतौल इंस्पेक्टर के साथ अन्य सहायक स्टाफ नियुक्त किया गया है। नापतौल में गड़बड़ी और एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) वसूलने वाले दुकानदारों और फर्मों पर लगाम लगाने का जिम्मा इसी विभाग के पास है। विभाग के नाम पर केवल एक इंस्पेक्टर की नियुक्ति के चलते गड़बड़ी का धंधा जमकर फलफूल रहा है। कार्रवाई नहीं होने के अभाव में विक्रेताओं के मन में कोई डर नहीं है।
कम से कम दस हजार और सजा का है प्रावधान
खाद्य पदार्थों के वजन में गड़बड़ी और सीलबंद वस्तुओं पर अंकित रेट से अधिक रुपये वसूलने पर नियमानुसार चालान और सजा का प्रावधान है। किसी भी उपभोक्ता को तौल या कीमत में गड़बड़ी लगती है तो वह लिखित में नारनौल रोड पर गोपाल देव चौक स्थित मापतौल विभाग में लिखित शिकायत दे सकता है।
जांच के बाद इंस्पेक्टर विवेकानुसार फाइन कर चालान काट सकता है। चालान की राशि कम से कम दस हजार होती है। इसी के साथ सजा का भी प्रावधान है। विभाग की सुस्त रफ्तार से धोखाधड़ी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
पेट्रोल पंप एवं रेहड़ियों की अधिक शिकायतें
विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ताओं द्वारा पेट्रोल पंप से कम तेल मिलने की सबसे अधिक शिकायतें आती हैं। दूसरे नंबर पर रेहड़ियों की होती है। लोगों की शिकायत होती है कि जो वस्तु उन्होंने रेहड़ी से खरीदी बाद में वजन करने पर कम मिलता है। आंकड़ों के अनुसार विभाग की तरफ से जांच तो की गई, लेकिन कार्रवाई शून्य ही रही। अधिकारियों की मानें तो इसका कारण उपभोक्ता एवं दुकानदारों में समझौता होना भी है।
जागरूकता की कमी से कटती है जेब
दुकानदारों एवं बड़ी फर्मों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अधिकारिक रूप से विभाग का गठन जरूर किया। लेकिन लोगों को जागरूक करने में वह बहुत पीछे रह गया। जिले के अधिकतर लोगों को यह तक नहीं पता कि शिकायत कहां करनी हैं। जिले में कहीं पर भी नापतौल विभाग के दफ्तर का अतापता नहीं है। शनिवार को लोगों से जब इस विषय पर बात की गई तो अधिकतर दफ्तर का पता नहीं बता पाए।
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वर्जन-
हमें यह नहीं पता है कि मापतौल विभाग कहां हैं और इसके अधिकारी का क्या नंबर है। प्रशासन को चाहिए कि सार्वजनिक स्थानों पर विभाग के दफ्तर का नंबर और पते के साथ होर्डिंग लगाने चाहिए। जब कभी हम बस स्टैंड या मूवी देखने जाते हैं तो यहां पर दुकानदार उनसे एमआरपी से ज्यादा वसूल लेते हैं। शिकायत करते भी हैं तो कभी कार्रवाई नहीं जाती। - प्रिया कुमारी, छात्र
कानून ने हमें सभी अधिकार दिए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ दुकानदारों द्वारों जेब काट ली जाती है। पेट्रोल पंप पर तो कई बार ऐसा हो चुका है। मापतौल विभाग को कोई नंबर नहीं होने के कारण शिकायत तक नहीं कर पाते हैं। विभाग को चाहिए कि सिनेमा हॉल के बाहर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और पेट्रोल पंप विभाग का नंबर अंकित करें ताकि शिकायत की जा सके। - रवि कुमार, उपभोक्ता
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रेवाड़ी ही नहीं कहीं पर भी जाएं सार्वजनिक स्थानों पर एमआरपी से ज्यादा पैसा वसूलना आम बात हो चुकी है। दुकानदार को कहते हैं तो वह लड़ने के लिए तैयार रहता है। मापतौल विभाग के कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ होने के कारण ऐसे लोगों के हौसले बुलंद हैं। समय-समय पर विभाग कार्रवाई करे तो धोखाधड़ी करने वाले लोगों पर लगाम लग सकती है। - रवि यादव, शक्ति नगर
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पूरा जीवन ईमानदारी एवं देश की सेवा करते गुजार दिया है। जब कभी सार्वजनिक स्थानों पर जाते हैं तो रेस्टोरेंट या फिर अन्य दुकानदार एमआरपी से ज्यादा वसूलने पर अड़ जाते हैं। जवाब मांगने पर सर्विस और अन्य बात कहते हैं। एमआरपी में सब कुछ जुड़ा हुआ होता है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि औरों को सबक मिल सके। विभाग को भी सजग होना होगा। - रणबीर सिंह, पूर्व सैनिक
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वर्जन-
मेरा पांच महीने पहले ही रेवाड़ी स्थानांतरण हुआ है। रूटीन चेकिंग की जा रही हैं। लोग लिखित में शिकायत करने को तैयार नहीं होते हैं। जिसके चलते गड़बड़ी करने वाले कार्रवाई से बच जाते हैं। जहां पर भी ऐसी शिकायत हो तो उन्हें शिकायत करें। हम निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगे। गड़बड़ी पाए जाने पर कम से कम दस हजार रुपये का चालान किया जाता है। सजा का भी प्रावधान है। - सुरेंद सिंह, इंस्पेक्टर, नापतौल विभाग, रेवाड़ी।