मंचन के दौरान श्रीराम व बाली संवाद करते कलाकार। स्त्रोत: आयोजक
रेवाड़ी। रेलवे कॉलोनी स्थित श्री राम मंदिर रेलवे ड्राॅमेटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला में सीताहरण, बाली वध और जटायु प्रसंग का मंचन किया गया। रामलीला में रावण ने सीता माता का हरण किया जबकि श्रीराम ने बाली का वध किया।
रामलीला का शुभारंभ पं.मोहन लाल शर्मा के मंत्रोच्चारण के साथकिया। पार्षद डॉ. सत्यनारायण यादव और मनीष कुमार टिकानिया ने किया। रामलीला में दिखाया गया कि रावण का मामा मारीच हिरण का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। स्वर्ण मृग को देख सीता श्रीराम राम से उसे पकड़कर लाने का आग्रह करती हैं। श्रीराम हिरण के पीछे चले जाते हैं।
कुछ समय बाद सीता, लक्ष्मण को भी राम की सहायता के लिए भेज देती हैं। इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर सीता का हरण कर लेता है। सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए जटायु महाराज प्रयास करते हैं, लेकिन रावण उनके पंख काट देता है।
पंचवटी लौटने पर राम और लक्ष्मण को सीता नहीं मिलतीं। दोनों व्याकुल होकर उनकी तलाश में निकल पड़ते हैं। रास्ते में घायल जटायु उन्हें सीता हरण की पूरी घटना बताते हैं और भगवान राम की गोद में अपने प्राण त्याग देते हैं।
इसके बाद भगवान राम की शबरी से भेंट का प्रसंग दिखाया गया। शबरी वर्षों से राम के आने की प्रतीक्षा कर रही होती हैं। वह प्रेमपूर्वक उन्हें बेर खिलाती हैं और किष्किंधा पर्वत पर जाकर सुग्रीव से मिलने का आग्रह करती हैं। वहां राम की मुलाकात सुग्रीव, जामवंत, नल-नील और हनुमान से होती है। सुग्रीव उन्हें बाली के कारण झेल रहे कष्टों की कहानी सुनाते हैं।
भगवान राम सुग्रीव की सहायता करते हुए बाली से युद्ध के लिए भेजते हैं और पेड़ की आड़ से बाली का वध करते हैं। प्रसंग में बताया गया कि बाली को ब्रह्मा से वरदान प्राप्त था कि सामने से युद्ध करने वाले की आधी शक्ति उसमें समा जाती थी।