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11 हजार परिवारों को नवंबर से राशन का संकट

Sat, 20 Aug 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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Aadhaar card
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केंद्र सरकार की ओर से नवंबर से बायोमीट्रिक मशीन से राशन देने की योजना से जिले के 11 हजार परिवारों के सामने राशन का संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल अभी तक जिले में राशनकार्डों को आधार से लिंक कराने का काम 87 फीसदी ही पूरा हुआ है। 13 फीसदी अभी भी इनसे वंचित हैं। वहीं 15 सितंबर से बायोमीट्रिक को लेकर डिपो होल्डर्स का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। इसके बाद यह प्रक्रिया और धीमी हो जाएगी। इससे इन परिवारों के राशन पर एक दम संकट खड़ा होने की आशंका है।
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सरकार ने राशनकार्डों  एवं वितरण में होने वाले फर्जीवाडे़ को रोकने के लिए बायोमीट्रिक प्रणाली से राशन वितरण की प्रणाली शुरू की है। इसकी हरियाणा में एक नवंबर से शुरुआत होगी। इसमें एक कार्ड के सभी उपभोक्ताओं के थंब इंप्रेशन लिए जा रहे हैं। इसके चलते परिवार के सदस्य कोई अन्य व्यक्ति उसके खाते का राशन नहीं ले सकता। लेकिन इस कार्य को अभी जिले में 87 फीसदी ही पूरा किया है।

धीमी प्रक्रिया के चलते अभी बचे हुए 13 फीसदी परिवार राशन से एकदम वंचित हो सकते हैँ। हालांकि आधार लिंक की प्रक्रिया अनवरत चलती रहेगी। लेकिन धीमी प्रक्रिया से इन परिवारों पर एकदम तो संकट आना स्वाभाविक है। वर्तमान में जिले में 296 राशन डिपो से 87794 कार्डों पर प्रत्येक महिने लगभग दो हजार मीट्रिक टन राशन का आवंटन किया जाता है।
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उल्लेखनीय है कि राज्य में यह प्रणाली एक जनवरी 2016 से लागू होनी थी। लेकिन सरकारी व्यवस्था के ढीली रवैये के चलते इसे पहले ही 11 माह लेट कर दिया। जबकि पड़ौसी राज्य राजस्थान में यह प्रणाली लागू हो चुकी है।

ऐसे काम करेगी बायोमीट्रिक मशीन
खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से जिले के सभी राशन कार्डों को आधार से जोड़ने के साथ ही राशन कार्ड में दर्शाए गए सभी सदस्यों  को आधार कार्ड से जोड़कर डेटा बेस तैयार किया जा रहा है। इस डेटा बेस की बात करें तो राशन कार्डों में दर्शाए गए 71 फीसदी लोगों की फीडिंग की जा चुकी है। बायोमीट्रिक मशीन इंटरनेट के जरिए सीधे खाद्य आपूर्ति विभाग के मुख्यालय से जुड़ेगी। इसके तहत राशन कार्ड मे दर्ज परिवार के सदस्य ही थंब इंप्रेशन लगाकर अपना राशन ले सकते हैं। जिले के डिपो होल्डरों को बायोमीट्रिक आपरेट करने की ट्रेनिंग 15 सितंबर से शुरू कर दी जाएगी।

फीडिंग की धीमी प्रक्रिया से खड़ी होगी समस्या
विभाग के अधिकारियों के अनुसार योजना जनवरी 2016 में ही शुरू की जानी थी, लेकिन राशन कार्डों को आधार कार्ड से जोड़ने (फीडिंग) की धीमी प्रक्रिया के चलते यह शुरू नहीं हो सकी। अधिकारियों का कहना है कि सौ फीसदी राशन कार्डों को जोड़ने का काम किया जा रहा है,लेकिन यदि नवंबर से पहले सभी राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं हो पाए तो बिना आधार लिंक वाले राशन कार्डों का राशन नहीं मिल पाएगा।

गांवों के राशन पर अधिक संकट
सरकार का प्रयास पीडीएस सिस्टम में बड़े स्तर पर होने वाली धांधली पर रोक लगाने का है। बड़ा सवाल यह है कि दुरुस्त करने के प्रयास में ग्रामीण तबका कहीं राशन से वंचित न रह जाए। बायोमीट्रिक मशीन चलाने के लिए बिजली एवं इंटरनेट अति आवश्यक हैं। गांव में यदि बिजली एवं इंटरनेट उपलब्ध नहीं हो पाया तो ऐसे में राशन का वितरण कैसे हो पाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल डाटा आनलाइन करने के मामले में बिजली एवं इंटरनेट की समस्या किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में प्रशासन इन समस्याओं का कैसे निदान कर पाएगा देखने वाली बात है।

वृद्धजनों के थंब इंप्रेशन करेंगे परेशान
पड़ोसी राज्य राजस्थान में राशन वितरण बायोमीट्रिक मशीन से शुरू हो चुका है। लेकिन यहां पर भी बुजुर्गों के थंब इंप्रेशन का मिलान नहीं होने के चलते उनको राशन नहीं मिल पा रहा है। यूं तो राशन कार्ड में परिवार के सभी सदस्यों के थंब इंप्रेशन इंगित होते हैं। इनमें से कोई भी व्यक्ति राशन डिपो जा कर राशन ले सकता है,लेकिन सवाल यह है कि जिस परिवार में बुजुर्ग दंपति हैं। उसमें थंब इंप्रेशन में आने वाली समस्या का समाधान कैसे हो पाएगा। पेंशन वितरण में बुजुर्गों के थंब इंप्रेशन की समस्या कई बार सामने आ चुकी है।

एक्सपायरी डेट 31 दिसंबर, नए बनाने का कोई प्लान नहीं
जिले के सभी राशन कार्डों की एक्सपायरी डेट 31 दिसंबर है। अर्थात 31 दिसंबर के बाद ये पूराने राशन कार्ड वैलिड नहीं रहेंगे, लेकिन खाद्य आपूर्ति विभाग के पास अभी तक नए राशन कार्ड बनाने का कोई प्लान तक नहीं है। विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि यह बड़ा सवाल है कि जिले के लगभग अस्सी हजार राशन कार्डों को विभाग इतने कम समय में कैसे रिन्यू कर पाएगा।

विभाग तेजी से राशन कार्डों की फीडिंग का काम कर रहा है। 13 फीसदी राशन कार्ड अभी तक भी फीड नहीं हो पाए हैं। ऐसे में इनके लिए एक नवंबर से राशन मिलना मुश्किल हो जाएगा। बिजली, इंटरनेट एवं बुजुर्गों के सामने आने वाली समस्या के हल के लिए भी विभाग कम कर रहा है।
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डॉ. प्रेमपाल सिंह, डीएफएसओ, रेवाड़ी।

 
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