सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में चल रही फार्मासिस्ट की हड़ताल के तीसरे दिन स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गई। शहर के नागरिक अस्पताल में एंटी बॉयोटिक दवा के अलावा दमा, गैस आदि के लिए लगाए जाने वाले जरूरी इंजेक्शन तक खत्म हो गए। ऐसे में मरीजों को चिकित्सीय परामर्श तो मिल रहा है, लेकिन दवा के नाम पर लाइनों में खड़े के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है।
गुरुग्राम स्थित वेयर हाउस से दवाएं लाने का काम चीफ फार्मासिस्ट का होता है। इनके बिना कोई दवा नहीं आ सकती है। ऐसे में तीन दिन से हड़ताल पर गए फार्मासिस्ट की गैर मौजूदगी में दवाएं नहीं आ रही है। स्टॉक पूरी तरह से खाली हो चुका है।
वायरल बुखार के चलते प्रतिदिन अस्पताल में 1500 से अधिक ओपीडी आ रही है। इस महीने में ओपीडी ज्यादा होने की वजह से दवाईयों की खपत भी ज्यादा हो रही है। पिछले तीन दिन से फार्मासिस्ट हड़ताल पर बैठे हैं। ऐसे में दवाओं के अभाव में हालात बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
खांसी की दवा तक नहीं मिल रही
शहर के नागरिक अस्पताल में शूगर के लिए गोलियां हो या फिर खांसी के लिए सिरप सब कुछ खत्म हो चुका है। ऐसे में जिम्मेदारों की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था का दावा भी धरातल पर कम ही दिख रहा है। इसी के साथ टीकाकरण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम भी पूरी तरह से प्रभावित है।
इन मांगों को लेकर की जा रही है हड़ताल
हड़ताली फार्मासिस्ट की मुख्य मांग 4600 ग्रेड पे की है। जिसकी स्वीकृति मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री दे चुके हैं। एसोसिएशन के जिला प्रधान अनिल ने कहा कि आगे भी फार्मासिस्ट हड़ताल पर रहेंगे। यदि मांगे नहीं मानी गई तो हड़ताल अनिश्चितकाल में बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि कई पीएचसी में दवाई स्टाफ नर्स ने बांटी है, जो कि एक्ट के खिलाफ है। इसकी शिकायत की गई है।
बोले परेशान मरीज
- लक्ष्मीनारायण ने बताया कि कई देर लाइन में खड़े रहने के बाद भी पुरी दवाई नहीं मिल पाई। बीमार होने की वजह से खड़े रहने से भी ज्यादा समस्या आई।
कृष्ण ने बताया कि दवाई बाहर से लेनी पड़ रही है। सारी दवाईयां नहीं मिल पा रही है। ऊपर से बहुत देर लाइन में लगने के बाद बारी आई, इसके बाद पूरी दवा भी नहीं मिली।
सुरेंद्र ने बताया कि अस्पताल में पुरी दवाइयां नहीं मिल पा रही। बाहर से मंहगी-मंहगी दवाई लेनी पड़ रही है।
रवि ने कहा कि फार्मासिस्ट की दवाई लेने में घंटो लग रहे है। उसके बाद भी बाहर से ही दवाई लेनी पड़ी। यह मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।