संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिले में चल रहे 397 में से पचास से अधिक राजकीय प्राथमिक स्कूलों के भवन जर्जर हैं। कहीं प्लास्टर गिर रहा है तो कहीं छत से पानी टपकता है। इसकी वजह से कहीं धर्मशाला तो कहीं एक ही कमरे में पांच कक्षाएं लगाई जा रही हैं। ऐसे स्कूलों में बच्चों के साथ ही अध्यापक भी बैठने से डरते हैं। यही कारण है कि इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही हैं।
अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। शहर के कुतुबपुर में प्राइमरी स्कूल की कक्षाएं धर्मशाला में लगाई जा रही हैं। गांव खातीवास में आंगनबाड़ी केंद्र में स्कूल चल रहा है। हालांकि स्कूलों के मुखिया ने विभाग को पत्र भेजे है लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे में यह उदासीनता कभी भारी पड़ सकती है। अभिभावकों ने भी शिक्षा अधिकारियों को ज्ञापन देकर स्कूल भवन की मांग कर चुके हैं। जिले में 397 राजकीय प्राथमिक स्कूलों 26 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। सरकार नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल को सुंदर बनाने के लिए प्रतियोगिताएं भी कराती है लेकिन प्राइमरी स्कूलों के बदहाल भवनों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ऐसे में जर्जर स्कूलों के अध्यापक बच्चों को खुले में बैठाते हैं। 15 से अधिक स्कूल ऐसे भी हैं जो महज एक ही कमरे में पांच कक्षाएं लगाई जा रही हैं जिसमें रसोई से लेकर कक्षा व कार्यालय बनाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक स्कूलों में भवनों की मरम्मत व निर्माण संबंधी योजना बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। कई स्थानों पर जगह का अभाव होने की वजह से स्कूलों का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
कहीं झड़ रहा प्लास्तर तो कहीं टपक रही छत
कोसली, रेवाड़ी शहर, बावल, धारूहेड़ा व कुंड क्षेत्र के 20 से ज्यादा स्कूलों में बारिश के दौरान छत टपकती है, जिसके कारण बच्चे भीग कर बीमार पड़ते हैं। वहीं करीब 10 से 12 स्कूल ऐसे भी हैं जिनके भवनों की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी लंबे समय से उनकी मरम्मत नहीं की जा रही है। ऐसे में इन स्कूलों की दीवारें व भवन बच्चों व शिक्षकों के लिए डर का माहौल पैदा कर रही हैं।
केस: 1
शहर के कुतुबपुर स्थित फ्लाइओवर के नीचे चल रहे राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में जगह न होने से बच्चों को धर्मशाला में पढ़ाया जा रहा है। धर्मशाला के बाहर बेसहारा पशुओं का जमावड़ा रहता है और वहीं कचरा प्वाइंट भी है। इससे बच्चे परेशान होते हैं। धर्मशाला में जब कोई कार्यक्रम होता है तो बच्चों को बाहर निकाल दिया जाता है।
केस: 2
नया गांव दौलतपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन जर्जर होने की वजह से बच्चों को परेशानी हो रही है। भवन की दीवारें जगह-जगह से टूट रही हैं। उनके अंदर दरारें पड़ रही हैं। वहीं एक कमरे में बैठाकर पांच कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
केस: 3
शहर के गोल चक्कर स्थित स्कूल नंबर- चार कभी भी जमींदोज हो सकता है। स्कूल में पढ़ने वाले करीब सौ बच्चे खतरे के बीच पढ़ रहा है। नगर के लोगों ने कई बार स्कूल की दशा के बारे में अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।
वर्जन:
कुतुबपुर व कई अन्य जगह स्थित स्कूलों का टीम ने दौरा किया है लेकिन जगह न मिलने की वजह से बिल्डिंग नहीं बन पाई। ऐसे में स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट करना ही एकमात्र रास्ता है। इसके लिए टीम गठित कर अन्य स्थानों पर जमीन की तलाश कर रही है।
-संजय कुमार, जेई शिक्षा विभाग रेवाड़ी।
मामला मेरे संज्ञान में है। जल्द टीम गठित कर सभी स्कूलों का निरीक्षण कराया जाएगा। जिस भी स्कूल में जैसी भी समस्या है उसका समाधान निकाला जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि बच्चों को अच्छे भवनों में बेहतर शिक्षा प्रदान की जाए।
-विरेन्द्र नारा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।