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बढ़ा मुआवजा नहीं मिलने पर आशीर्वाद यात्रा में विरोध जताएंगे किसान

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बावल स्थित एचएसआईआईडीसी। - फोटो : Rewari
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एक दर्जन गांवों के किसानों को बावल औद्योगिक क्षेत्र में सरकार द्वारा अधिग्रहण की गई जमीन का बढ़ा हुआ करीब 900 करोड़ रुपये का मुआवजा नहीं मिला। किसान लगातार हरियाणा राज्य औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के चक्कर काट रहे हैं, अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से किसानों में रोष है। इसको लेकर किसान 31 अगस्त को बनीपुर चौक पर आयोजित मुख्यमंत्री मनोहरलाल की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान विरोध दर्ज करने की तैयारी में हैं।
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हाईकोर्ट द्वारा बावल औद्योगिक क्षेत्र के फेज 1 व 2 के लिए 22 अगस्त 2017 एवं फेज 3 व 4 के लिए सात मई 2018 को किसानों के हक में फैसला देते हुए जल्द मुआवजा देने के आदेश दिए थे। निगम पर किसानों का 903 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि निगम की ओर से औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कंपनियों से करीब पांच सौ करोड़ रुपये वसूले जा चुके है।
ये है पूरा मामला
बावल औद्योगिक क्षेत्र में कंपनियां स्थापित करने के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास निगम(एचएसआईआईडीसी) द्वारा किसानों की जमीनों को अधिग्रहण किया गया था। जमीनों के रेट बढ़ने से किसानों ने वर्तमान दर के हिसाब से मुआवजा लेने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। निचली अदालत के बाद किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने फेज एक व दो के लिए 27 अगस्त 2017 को आदेश जारी किए। फेज तीन व चार के लिए सात जून 2018 को आदेश जारी किए। हाईकोर्ट के आदेशानुसार एचएसआईआईडीसी को जल्द से जल्द किसानों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि दी जानी चाहिए। बावल एचएसआईआईडीसी अधिकारियों की ओर से उच्चाधिकारियों को फाइल भेजे जाने का दावा किया ज रहा है, लेकिन धरातल में ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया। आश्वासनों से तंग आ चुके किसान अब आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।
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फेज 1 और 2 के लिए साढे़ 19 लाख रुपये तक प्रति एकड़ मुआवजा
हाईकोर्ट के आदेशानुुसार वर्ष 2006 में फेज 1 और 2 के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के लिए किसानों को करीब सोलह से साढे़ 19 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि दी जानी चाहिए थी। आदेश के बाद किसानों को मात्र एक किस्त ही दी गई है। बकाया राशि के लिए किसानों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
फेज 3 और 4 के लिए 86 लाख रुपये तक प्रति एकड़ मुआवजा
सात जून को दिए हाईकोर्ट के आदेशानुसार वर्ष 2008 व 2010 में फेज तीन व चार के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के लिए करीब 86 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाना था। लेकिन किसानों को मुआवजा राशि के लिए भटकना पड़ रहा है।
इन गांवों का सबसे ज्यादा बकाया
क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों का निगम की ओर करीब 903 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया है। जिनमें सबसे अधिक आसलवास का 203 करोड रुपये, रूध का 180 करोड़, बावल का 120 करोड़ व बनीपुर का सौ करोड़ रुपये का मुआवजा राशि है।
जनप्रतिनिधियों ने भी नहीं कराया समस्या का समाधान : सरपंच
आसलवास गांव के सरपंच राजेश ने कहा कि किसानों को अपनी जमीन की मुआवजा राशि के लिए ही अधिकारियों के पास चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अधिकारियों के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में भी कई बार इस मामले को लाया गया है।, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। 31 अगस्त को मुख्यमंत्री के सामने रोष प्रकट किया जाएगा।
-राजेश, सरपंच ग्राम पंचायत आसलवास
जमीन की मुआवजा राशि के लिए किसान रोजाना निगम के अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। कोई अधिकारी किसानों से ढंग से बातचीत भी नहीं करते हैं। इसलिए 31 अगस्त को मुख्यमंत्री के सामने रोष प्रकट किया जाएगा।
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-रामजस, बनीपुर
किसानों के मुआवजा के लिए उच्च अधिकारियों के पास फाइल भेजी जा चुकी है। जल्द ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-मुकेश गुप्ता, डीजीएम एचएसआईआईडीसी बावल
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