फोटो : 9भाड़ावास मार्ग के पास बेच रहे मिट्टी के दीये। संवाद
रेवाड़ी। दीपावली नजदीक आने के साथ ही दीपोत्सव की तैयारी शुरू हो गई है। दीपावली पर लोगों के घर-आंगन को रोशन करने के लिए कुम्हार मिट्टी के दीये बनाने में जी-जान से जुट गए हैं। इस बार भी बाजार में मिट्टी के दीयों की मांग में सबसे अधिक है।
दीपावली पर लोग बिजली के रंगबिरंगी झालरों से घरों को सजाते के साथ ही मिट्टी की दीयों को जलाते हैं। दीपावली पर मिट्टी के दीयों को जलाना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि मिट्टी की दीयों की मांग बढ़ी है। कुम्हार राजेश और सुदेश ने बताया कि पिछले वष की तुलना में इस बार दीयों के दामों में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। मिट्टी की दीये 200 रुपये सैकड़ा के हिसाब से बिक रहे हैं।
कुम्हारों का कहना है कि महंगाई और मिट्टी सहित अन्य सामग्री की बढ़ती लागत के बावजूद लोग पारंपरिक दीये ही खरीदना पसंद कर रहे हैं। मानना है कि ये न सिर्फ घरों को रोशनी से जगमगाते हैं। बाजारों में सजावट के साथ-साथ रंग-बिरंगे दीये, मिट्टी की मूर्तियां और सजावटी मिट्टी से बने सामान भी ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं।
मिट्टी के दीयों की हमेशा मांग
भाड़ावास चौक पर मिट्टी के दीये बेचने वाले कृष्ण कुमार ने बताया कि हर घर दीवाली पर मिट्टी के दीयों से जगमगाता है। लोग लाइटों का भी उपयोग करते हैं। मगर मिट्टी के दीयों की डिमांड हमेशा रहती है। इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है। सरोज प्रजापति ने बताया कि मिट्टी की कमी के कारण हर साल दीयों के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो रही है। फिर भी डिमांड पूरी हो जाती है। मौजूदा समय में मिट्टी को लेकर भी काफी संघर्ष करना पड़ता है। कई बार मिट्टी समय पर नहीं मिल पाती है। बारिश के समय में ये परेशानी और ज्यादा होती है।