रेवाड़ी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से हाल ही में पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों के सॉफ्टवेयर को अपडेट किया गया है ताकि राशन वितरण प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जा सके। अब यह नई व्यवस्था डिपो होल्डरों और राशन कार्ड धारकों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद अब प्रत्येक राशन कार्डधारक को गेहूं, तेल और चीनी लेने के लिए अलग-अलग बायोमीट्रिक फिंगरप्रिंट देना पड़ रहा है। पहले जहां एक बार फिंगरप्रिंट लगाने से काम पूरा हो जाता था, वहीं अब तीन बार फिंगरप्रिंट लगाना पड़ रहा है। इससे एक व्यक्ति को राशन प्राप्त करने में पहले की तुलना में तीन गुना अधिक समय लग रहा है।
पहले जहां एक कार्डधारक की प्रक्रिया में करीब पांच मिनट लगते थे, वहीं अब 10 से 15 मिनट तक समय लग रहा है। फिंगरप्रिंट मिसमैच या नेटवर्क समस्या होने पर यह समय और बढ़ जाता है। इसके साथ ही जिले में अधिकतर पीओएस मशीनें अभी भी 2जी नेटवर्क पर चल रही हैं, जिससे प्रक्रिया और धीमी हो जाती है।
जिले में कुल 253 राशन डिपो हैं, जिनके माध्यम से 1.31 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) और एएवाई (अंत्योदय अन्न योजना) परिवारों को हर माह राशन वितरित किया जाता है। बीपीएल कार्डधारकों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम गेहूं, 1 किलोग्राम चीनी और 2 किलोग्राम सरसों का तेल दिया जाता है।
वहीं, एएवाई कार्ड पर 35 किलोग्राम गेहूं, 1 किलोग्राम चीनी और 2 किलोग्राम सरसों का तेल मिलता है। सर्दी के मौसम में बीपीएल कार्डधारकों को प्रति व्यक्ति 3 से 5 किलोग्राम गेहूं दिया जाता है, जबकि एएवाई कार्ड धारकों को 24 किलोग्राम बाजरा और 11 किलोग्राम गेहूं वितरित किया जाता है।
डिपो होल्डरों का कहना है कि नई तकनीक से पारदर्शिता तो बढ़ी है, लेकिन मशीनों की धीमी स्पीड और बार-बार फिंगरप्रिंट देने की बाध्यता से वितरण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विभाग से मांग की जा रही है कि या तो मशीनों को अपग्रेड किया जाए या सॉफ्टवेयर में सुधार लाकर इस दिक्कत को दूर किया जाए।
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वर्जन
मशीनों की धीमी गति को लेकर मामला मुख्यालय के संज्ञान में है। इस पर काम चल रहा है, जल्द समाधान होने की उम्मीद है। - जयकुमार, सहायक खाद्य आपूर्ति नियंत्रक