राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नेताओं ने अपनी अगली पीढ़ी मैदान में उतार ली है। रैली हो या अन्य कोई कार्यक्रम, राजनीति के जानकारों को नई पीढ़ी की सक्रियता से इनके संकेत समझ में आ रहे हैं। नेता भी अगली पीढ़ी के दम पर नई पीढ़ी पर पकड़ बनाए रखना चाहते हैं।
हरियाणा में अहीरवाल की राजनीति अपना खासा स्थान रखती है। यहां से निकले नेता देश और प्रदेश में छाए रहे हैं। समय के साथ अब राजनीति में भी बदलाव आया है। अब जनप्रतिनिधि अपनी अगली पीढ़ी को सक्रिय करने में जुटे हैं। वह उनको राजनीतिक के हर दांव-पेच से भलीभांति अवगत करा रहे हैं। इसमें चाहे बेटा हो या बेटी। इसका फर्क नहीं कर अपनी राजनीतिक विरासत बढ़ाने के प्रयास में हैं हालांकि कई राजनीतिज्ञ ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी राजनीति विरासत में मिली।
लोकसभा चुनाव से पूर्व से सक्रिय हैं आरती राव
शहरी विकास राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव की राजनीति में सक्रियता सभी जानते हैं। कांग्रेस से अलग होने के बाद जब राव इंद्रजीत सिंह ने इंसाफ मंच बनाया तो आरती राव को इसका उपाध्यक्ष घोषित किया। इसके बाद से आरती राव सक्रिय राजनीति में उतर आई। लोकसभा चुनाव में भी आरती राव ने अपने पिता के लिए जमकर प्रचार किया। फिर जब बात विधानसभा चुनाव की आई तो राव इंद्रजीत सिंह ने भी रेवाड़ी विधानसभा से आरती राव को टिकट दिलाने का प्रयास किया।
हालांकि उन्हें टिकट नहीं मिली। इसके बाद गत दिनों तिरंगा यात्रा के दौरान केंद्रीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर की उपस्थिति में भी आरती ने राव ने अपनी सक्रिय राजनीति की छाप छोड़ी। राव तुलाराम की पुण्यतिथि पर मनाए जाने वाले शहीदी दिवस कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. बनवारीलाल, नारनौल विधायक ओमप्रकाश, पटौदी विधायक बिमला देवी सहित कई राजनीति के दिग्गजों के सामने आरती का आना राजनीति का स्पष्ट संदेश दे रहा था। इससे पूर्व राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव बीरेंद्र सिंह भी हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
चिरंजीव के लिए कर चुके हैं ऐलान
लगातार छह बार रेवाड़ी शहर की सत्ता पर काबिज रहने वाले पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव गत दिनों सार्वजनिक रूप से अपने बेटे चिरंजीव को चुनाव लड़ाने का ऐलान कर चुके हैं। गत स्वयं को लोकसभा के साथ उन्होंने चिरंजीव के लिए विधानसभा चुनाव लड़ाने की बात कही। चिरंजीव फिलहाल कांग्रेस में प्रदेश महासचिव पद पर है। अपने पिता की राजनीति में भी उनका काफी हस्तक्षेप रहा है। अब फिलहाल वह यूथ कांग्रेस चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। कैप्टन अजय यादव भी उन्हें हर हाल में यूथ कांग्रेस का चुनाव जिताना चाहते हैं ताकि उनका अगले विधानसभा में टिकट की दावेदारी पेश की जा सके।
मुकेश की सक्रियता भी चकित करने वाली
चार बार विधानसभा चुनाव लड़ने बाद विधायक बने शहर विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास हालांकि सार्वजनिक रूप से परिवारवाद की राजनीति का विरोध करते हैं लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद से उनके भतीजे मुकेश की सक्रिय राजनीति में दिलचस्पी राजनीतिक जानकारों को कई तरह के कयास लगाने पर मजबूर कर रही है। कापड़ीवास के हालांकि दो बेटे भी हैं। विधानसभा चुनाव और इसके बाद मुकेश ही उनका सारा काम देखता है।
कापड़ीवास का कहना है अब जनता समझदार है। वह सब जानती है। राजनीति में आदमी गुणों से टिकता है। मैं मेरे बेटों या भतीजे किसी को राजनीति में आने से नहीं रोकूंगा। मुकेश का गत विधानसभा चुनाव में यूएसए से रेवाड़ी गया था। गत दिनों ब्लॉक समिति चुनाव में भी मुकेश की रणनीति कारगर रही। वहीं रणधीर सिंह कापड़ीवास के पिता भी 40 साल तक कापड़ीवास गांव के सरपंच रहे।
सृजन यादव भी होने लगे सक्रिय
रेवाड़ी से विधायक रहे रघु यादव के बेटे सृजन यादव भी अब चुनावी पारी खेलने की तैयारी में है। वर्ष 2010 से सर्वजातीय पंचायतों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सृजन यादव अब सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी आगे दिखाई देते हैं। वर्ष 2011 में यूपीए सरकार के समय रामलीला मैदान में बाबा रामदेव पर की गई कार्रवाई के विरोध में रघु यादव ने बाबा रामदेव के गांव से राष्ट्रपति भवन तक पदयात्रा निकाली थी। इस यात्रा को निकालने में पिता के साथ सृजन यादव ने अहम भूमिका निभाई थी। इसी के बाद सृजन ने राजनीति में आने के संकेत दे दिए।
पिता की राह पर राव अर्जुन
शहरव्ी विकास राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के भाई अजीत के बेटे राव अर्जुन सिंह की गत दिनों से सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार बढ़ रही भागीदारी भी उनके राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा का विषय बन रही है। राव अजीत सिंह कई बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। बावल और अटेली भी इनका खासा प्रभाव रहा है। अपनी अस्वस्थतता के चलते गत दिनों पंचायत चुनाव में अजीत सिंह की पत्नी कविता सिंह ने रामपुरा से सरपंच का चुनाव लड़ा और जीती। चुनाव में अर्जुन सिंह का बड़ा अहम रोल रहा। अब सभी कार्यक्रमों में भी अर्जुन सिंह बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। अर्जुन सिंह की कांग्रेस में बढ़ती नजदीकियां उनकी कांग्रेस में जाने के संकेत दे रही हैं।