रेवाड़ी। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता ने 2 आरोपियों को नियमित जमानत दी है। आरोपियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अब परिस्थितियां बदल गई हैं क्योंकि पीड़िता, उसके पिता और माता तीनों अदालत में गवाह के रूप में पेश हुए हैं और उन्होंने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया।
इस प्रकार अभियोजन के पास अब कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, न ही कोई वैज्ञानिक प्रमाण जैसे सीसीटीवी फुटेज या एफएसएल रिपोर्ट मौजूद है। दोनों आरोपी जून से न्यायिक हिरासत में हैं और अब उनकी हिरासत जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
न्यायालय ने कहा कि जब प्रमुख गवाहों ने ही अभियोजन का समर्थन नहीं किया और कोई ठोस सबूत नहीं है तो आरोपियों को और अधिक समय तक हिरासत में रखना अनुचित होगा। अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानती राशि पर रिहा करने का आदेश दिया।
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यह था पूरा मामला
मामले के अनुसार 13 जून को झगड़े में घायल पीड़ित को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायल की मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त की जिनमें दो चोटों का उल्लेख था। घायल उस समय अस्पताल में उपस्थित नहीं था। अगले दिन 14 जून को पीड़ित थाना पहुंचा और बयान दर्ज करवाया कि वह अपनी पत्नी और चार बच्चों सहित रेवाड़ी शहर स्थित झोपड़ी में रहता है। उसकी 16 वर्षीय बेटी भी वहीं रहती थी।
जून में दोपहर के समय जब उसकी बेटी पानी भरने गई, तब एक आरोपी ने उसका हाथ पकड़ लिया। लड़की ने शोर मचाया तो उसकी मां वहां पहुंची और झगड़ा हो गया। इसी दौरान एक और युवक मौके पर पहुंचा और मारपीट की।
इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने विभिन्न धाराओं व पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। पहली जमानत याचिका 3 जुलाई को वापस ले ली गई थी।