पाइपालइन बिछाने का चल रहा कार्य। संवाद
धारूहेड़ा। मसानी बैराज में भरे दूषित पानी की समस्या से आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। जलनिकासी और उसे शोधित कर दोबारा उपयोग लायक बनाने के लिए 217 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है। इसके लिए 40 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा रही है। पहले चरण के लिए 125 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।
परियोजना के तहत बैराज में जमा दूषित पानी को निकालकर शोधित किया जाएगा और ड्रेन नंबर-8 तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए तीन वाटर बॉडी भी बनाई जाएंगी। बैराज से पानी की निकासी के साथ भविष्य में यहां पहुंचने वाले पानी को भी शोधित करने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि दोबारा दूषित पानी जमा होने की समस्या न बने।
मसानी बैराज में दूषित पानी जमा होने से आसपास के गांवों में जलभराव और भूजल की गुणवत्ता प्रभावित होने की समस्या सामने आती रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि दूषित पानी का स्तर बढ़ने से इसका असर दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। परियोजना पूरी होने पर पानी की दुर्गंध कम करने और इसे सिंचाई सहित अन्य कार्यों में उपयोग करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
विधायक ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को विधानसभा में दो बार उठाया था। विधानसभा की पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने टीम के साथ मौके का निरीक्षण भी किया था। विधायक ने बताया कि सरकार ने करीब 217 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा रेवाड़ी शहर में बारिश और सीवरेज के पानी को अलग करने के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। नासियाजी और कालूवास स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने और पानी को बेहतर तरीके से शोधित करने की योजना पर भी काम किया जाएगा।