पेट्रोल पंप संचालकों व किसानों की महापंचायत।
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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बार्डर 13 दिसंबर से धरना पर बैठे किसानों और स्थानीय किसान व पेट्रोल पंप संचालक आमने-सामने आ गए हैं। गुरुवार को स्थानीय किसानों व पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा महापंचायत का आयोजन कर शुक्रवार तक हाईवे खाली करने की चेतावनी दी गई है। इस दौरान खेड़ा बार्डर पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां पर राजस्थान पुलिस किसानों की सुरक्षा में तैनात है तो हरियाणा पुलिस बैरिकेड लगाकर मुस्तैद है।
बॉर्डर के दोंनों ओर भारी संख्या में हरियाणा व राजस्थान पुलिस की तैनाती कर दी गई है। बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में हाईवे स्थित खेड़ा बार्डर पर राजस्थान, पंजाब व महाराष्ट्र के सैकड़ों किसान धरना पर बैठे हैं। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा पुलिस की ओर से यहां भारी बैरिकेडिंग की गई है, जिससे हाईवे के रास्ते वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद है। जिससे स्थानीय ग्रामीणों, पेट्रोल पंप संचालकों व खेड़ा बार्डर के दुकानदारों में काफी रोष है।
करीब 15 दिन पहले भी स्थानीय ग्रामीणों व पेट्रोल पंप संचालकों ने पंचायत कर प्रशासन को चेतावनी दी थी लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया था। यहां 150 से अधिक पेट्रोले पंप व 500 से अधिक दुकानें है लेकिन किसानों के पड़ाव के कारण सभी ठप हैं। महापंचायत में स्थानीय किसानों ने कहा कि हरियाणा पुलिस को हाईवे से बैरिकेड को हटा देना चाहिए ताकि बार्डर के दूसरी ओर से बैठे आंदोलनकारी यहां से चले जाए लेकिन पुलिस ने बैरिकेड हटाने से मना कर दिया है। पंचायत में निर्णय लिया गया कि शुक्रवार तक हाईवे खाली नहीं कराया गया तो स्थानीय किसान भी इसके विरोध में आंदोलन खड़ा कर देंगे।
हरियाणा के किसानों की महापंचायत में हाईवे खाली करने की चेतावनी के बाद राजस्थान पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों की सुरक्षा बढ़ा दी। राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारी भी दिनभर धरना स्थल पर रहे। स्थानीय किसानों की चेतावनी के बाद हरियाणा व राजस्थान के प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आ गए। प्रशासन की ओर से आंदोलनकारी किसानों व स्थानीय किसानों के प्रतिनिधियों की देर रात तक आपस में बातचीत कराई गई लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है।