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नप के 31 में से आरक्षित वार्ड छह की बजाय पांच करने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका

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नगर परिषद रेवाड़ी का कार्यालय। - फोटो : Rewari
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21 माह से भंग चल रही शहरी सरकार के चुनाव की प्रक्रिया पर एक बार फिर से अड़ंगा लग गया है। शहर निवासी परमानंद ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 31 में से पांच की बजाय छह वार्ड आरक्षित करने की मांग की है। 21 अगस्त 2019 को चंडीगढ़ स्थित शहरी स्थानीय निकाय के डायरेक्टर की ओर से रेवाड़ी नप तदर्थ कमेटी की मौजूदगी में पांच वार्ड आरक्षित करने का ड्रॉ निकाला गया था। इसके बाद रेवाड़ी नगर परिषद (नप) सदन के गठन की उम्मीद बढ़ी थी। लेकिन अब बीते बुधवार को हाई कोर्ट में याचिका डालने के चलते चुनाव टलने की आशंका बढ़ गई है।
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रेवाड़ी नगर परिषद के 31 वार्ड के लिए 2013 में गठित हुए सदन का कार्यकाल 10 फरवरी 2018 को पूरा हो चुका है। नियमानुसार फरवरी 2018 से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कर सदन का गठन होना जरूरी थी। लेकिन नई और पुरानी वार्डबंदी के पेंच के चलते चुनाव अटक गए। नप की ओर से लाखों रुपये खर्च कर नई वार्डबंदी से चुनाव कराने के लिए सर्वे भी कराया गया, लेकिन बाद में फिर से पुरानी वार्डबंदी से चुनाव कराने का फरमान जारी कर दिया गया था। अब एक बार फिर से शहरी सरकार के चुनाव में वार्ड आरक्षण का ग्रहण लगता दिख रहा है।
2005 में अनुसूचित वार्डों की संख्या 6 थी, 2013 में घटा कर कर दी पांच
वर्ष 2005 में हुए नप चुनाव के दौरान शहर में अनुसूचित वार्डों की संख्या 6 थी। लेकिन तीन साल की देरी से वर्ष 2013 में हुए नप चुनाव के दौरान यह संख्या घटाकर कम कर दी गई। लोगों का कहना है कि वर्ष 2018 में नप की ओर से कराए गए सर्वे को छोड़ भी दिया जाए तो नियमानुसार 2011 के आंकड़ों के हिसाब से भी एससी वार्ड की संख्या 6 बनती है। लेकिन साजिश के तहत ऐसा नहीं किया जा रहा। 2013 में वार्ड- 25 को सामान्य कर दिया गया था।
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2017 में भी आरक्षित वार्ड संख्या 6 करने की जारी हो चुकी अधिसूचना
नगर परिषद भी अपने कारनामों के चलते खूब सुर्खियों में रहता है। जनवरी 2018 में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले 9 अक्तूबर 2017 में शहर के 6 वार्ड को आरक्षित करने की अधिसूचना जारी हो चुकी है। इसकी जानकारी भी आरटीआई के माध्यम से ही सामने आई है। ऐसे में आखिर अधिसूचना के बाद भी आरक्षित वार्ड की संख्या पांच क्यों की गई बड़ा सवाल है।
वार्ड रूल फार्मूले के हिसाब से वार्ड की संख्या होनी चाहिए सात
याचिका डालने वाले परमानंद ने बताया कि 2001 की जनगनना के अनुसार शहर में अनुसूचित जाति की संख्या 19988 बताई गई। वहीं 2011 में ये बढ़कर 26826 हो गई। इतना ही नहीं नप की ओर से लाखों रुपये की लागत से वर्ष 2018 मेें सर्वे कराया गया तो यह संख्या 41770 निकली। शहरी स्थानीय निकाय वार्ड रूल अर्थात एक्ट के सूत्र के हिसाब से आरक्षित वार्ड की संख्या सात बनती है। ऐसे में आंकड़ों को दरकिनार कर मनमर्जी से वार्ड की संख्या पांच 5 कर दी गई।
पुरानी वार्डबंदी से चुनाव कराने के तर्क पर भी सवाल
नप अधिकारियों की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि चुनाव पुरानी वार्डबंदी से कराए जा रहे हैं। अर्थात 2013 की वार्डबंदी को आधार बनाया गया है। लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि वार्ड- 12 में कालाका की क्षेत्र के मतदाताओं को जोड़ दिया गया, ऐसे में पुरानी वार्डबंदी कहां रह गई। पुरानी वार्डबंदी तब कही जा सकती है, जब क्षेत्र न बढ़ाया गया हो।
पुरानी वार्डबंदी से चुनाव की स्थिति में 6 वार्ड करने की हो चुकी सिफारिश
याचिकाकर्ता शहर के विकास नगर निवासी परमानंद ने कहा कि 21 मार्च 2018 को पुरानी वार्डबंदी से चुनाव कराने की स्थिति में उस समय डीसी रहे पंकज ने आरक्षित वार्ड की संख्या 6 करने की सिफारिश निदेशक शहरी स्थानीय निकाय चंडीगढ़ को की थी। लेकिन कुछ लोगों ने ऐसा नहीं होने दिया।
नप के पास वार्ड आरक्षित करने की अधिसूचना का नहीं रिकार्ड
याचिकाकर्ता ने 5 सितंबर 2018 को नगर परिषद अधिकारियों से आरटीआई के माध्यम से 21 अगस्त 2018 को चंडीगढ़ में वार्ड आरक्षण करने के लिए निकाले गए ड्रॉ के बाद जारी होने वाली अधिसूचना के बारे सूचना मांगी। नप की ओर से जवाब में कहा गया है कि बैठक की अधिसूचना बारे उनके पास कोई रिकार्ड नहीं है।
आरक्षित वार्ड के लिए जनसंख्या होता है आधार : एडवोकेट सुधीर यादव
बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट सुधीर यादव ने कहा कि वार्ड आरक्षित करने के लिए सबसे बड़ा आधार जनसंख्या होता है। यदि जनसंख्या को नजरअंदाज कर वार्ड की संख्या पांच की गई है तो निश्चित तौर पर याचिका स्वीकार की जाएगी। इसके लिए याचिकाकर्ता को जनसंख्या संबंधी कागजात कोर्ट को देने होंगे।
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