रेवाड़ी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के अध्यक्ष नरेंद्र पाल ने एक युवक की सड़क हादसे में मौत के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उसकी पत्नी और माता-पिता की तरफ से दायर दोनों मुआवजा याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
अधिकरण ने कहा कि दावेदार तृतीय पक्ष नहीं हैं बल्कि उन्होंने मृतक की जगह ली है जो संबंधित मोटरसाइकिल का मालिक-चालक था।
कहा कि जब बीमा पॉलिसी में व्यक्तिगत दुर्घटना का जोखिम (पीए कवर) शामिल नहीं था तो प्रतिवादी को मृतक सुनील कुमार की मृत्यु के विरुद्ध दावेदारों को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता जो स्वयं इस पॉलिसी में सीमित उद्देश्य अर्थात वाहन की स्वयं की क्षति के लिए बीमित था। यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी।
8 जून 2022 को हुआ था हादसा
मामले के अनुसार सुनील कुमार 8 जून 2022 की दोपहर बहका-ऊंचा रोड पर अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था। परिजनों के मुताबिक किसी अज्ञात वाहन ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में सुनील गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्हें सीएचसी खोल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे रेवाड़ी और फिर पीजीआई रोहतक रेफर किया गया जहां 10 जून को मौत हो गई।
पत्नी और माता-पिता ने मांगे थे 30 लाख रुपये
मृतक की पत्नी गांव बहु हाल खेड़ी रामगढ़ निवासी राजबाला ने क्लेम को लेकर दावा दायर किया था जबकि उसके माता-पिता और भाई ने अलग याचिका दायर की। दोनों ने लगभग 30 लाख मुआवजा और 2 लाख अंतिम संस्कार आदि में खर्च होने का दावा किया।
दावा कानूनी रूप से बनता ही नहीं
बीमा कंपनी का कहना था कि यह दावा कानूनी रूप से बनता ही नहीं क्योंकि सुनील कुमार खुद मोटरसाइकिल का मालिक और चालक था। उसने बीमा पॉलिसी में केवल ओन डैमेज और थर्ड पार्टी प्रीमियम दिया था, न कि पर्सनल एक्सीडेंट कवर का प्रीमियम। इसलिए बीमा कंपनी के ऊपर उसकी मौत के लिए कोई देनदारी नहीं बनती।