कोसली। कोसली में 800 वर्ष से फाग के दिन मेले की परंपरा का निर्वाह इस बार भी किया गया। फाग मेले में 50 गावों के लोगों ने भाग लिया। कोसली गांव जब से बसा है तभी से गांव में परंपरा के अनुसार फाग के दिन ऐतिहासिक मेला लगता है, जिसमें कुश्ती का भी आयोजन किया जाता है और होली गायन पार्टियों का क्षेत्र के ऐतिहासिक मठ के चबूतरे पर सम्मान किया जाता है।
गांव के नम्बरदार होशियार सिंह ने बताया कि मेला लगने की परंपरा 800 सालों से चली आ रही है। इस वर्ष भी फाग के दिन सुबह गांव के लोग ऐतिहासिक मठ में पहुंचे। इसके बाद बाबा मुक्तेश्वर पुरी की पालकी गांव का नेवकी सिर पर लेकर चला और पीछे-पीछे गांव के लोग चलते गए। यह पालकी गांव की चौपाल में जहां राजा कोसल सिंह ने अपना घर बना कर गांव बसाया था, उस घर में पूजा अर्चना की गई। इसके बाद वापस पालकी कोसली मठ में पहुंची। इसके बाद में मेला भरना शुरू हुआ और लोग बाबा के दरबार में पहुंच कर मन्नत मांगने लगे।
शाम को पालकी फिर से राजा कोसल के बनाए घर पर चौपाल में पहुंची और इस पालकी में बाबा के दरबार में आए चढ़ावे के रूप में रुपये भी ले जाया गया। गांव के नम्बरदार पैसों की गिनती करके और उन पैसों का हिसाब राजा के समय से चली आ रही बही में लिखा गया। इस साल दो लाख 66 हजार रुपये चढ़ावे के रूप में आया।
जुडडी गांव की टीम ने पाया प्रथम पुरस्कार
होशियार सिंह बताते हैं कि पूरे विश्व भर में कोसलिया गोत्र के लोगों का पूजनीय स्थल कोसली मठ है। जहां हर वर्ष फाग के दिन मेला लगता है और लोग मन्नतें मांगते हैं। गांव के माता मंदिर में दो दिवसीय कब्बडी प्रतियोगिता में जुड्डी गांव की टीम ने श्यामनगर को हराकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।