लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई गांव की सरकार के चुनने के लिए सर्द हवाओं के बीच भी वोटर घरों से निकले और पूरे उत्साह के साथ मतदान किया।
छोटे-मोटे विवाद के बीच दूसरे चरण के चुनाव खोल और नाहड़ ब्लॉक में संपन्न हुए। यहां 101 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान हुआ। शुरूआती दौर में भले ही मतदान की रफ्तार धीमी रही लेकिन इसके बाद बूथों के बाहर मेले जैसा माहौल बना रहा। दोपहर को हाल यह हुआ कि कई मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें लगी रही।
युवा, युवतियां से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों में चुनाव को लेकर पूरा जोश रहा। बूथों के बाहर प्रत्याशी और उनके समर्थक आने वाले वोटर से एक ही बात कहते रहे कि ध्यान रखना।
खास बात यह रही कि प्रत्याशियों के समर्थकों में वोटरों से अपील करने में महिलाएं भी आगे रही। महिलाएं टोलियों में वोट देने पहुंची। कइयों ने वोटरों के लिए गाड़ियों का प्रबंध किया तो कई वोटर खुद अपनी जिम्मेदारी समझते हुए गांव की सरकार चुनने के लिए वोट देने को पहुंचे।
ईवीएम खराब होने से 30 मिनट देरी से शुरू हुआ मतदान
नाहड खंड के गांव सहादत्तनगर में इवीएम मशीन खराब होने से बूथ नंबर-54 पर 30 मिनट देरी से मतदान शुरू हो सका। इस दौरान मतदाताओं को इंतजार करना पड़ा। प्रशासन की ओर से ईवीएम ठीक करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ भी कलस्टर के हिसाब से गांवों में भेजे गए थे। सूचना मिलने के बाद ईवीएम ठीक कर उसे शुरू किया गया।
झलकियां:
1. सहकारिता राज्य मंत्री बिक्रम सिंह अपनी पत्नी निवर्तमान जिला प्रमुख सुरेश देवी के साथ अपने गांव सहादत्तनगर में बूथ नंबर-54 पर वोट देने पहुंचे। वे सुबह करीब दस बजे पहुंचे, उस वक्त मतदाताओं की लाइन लगी हुई थी। मंत्री भी लाइन में लगे और अपनी बारी आने पर वोट किया।
2. प्रशासन ने मतदान केंद्रों की 200 मीटर के दायरे में धारा-144 लागू की हुई थी, लेकिन ऐसा कोई मतदान केंद्र नहीं दिखा, जहां इसका उल्लंघन न हुआ है। लगभग सभी बूथों के बाहर ही काफी भीड़ जमा रही। बूथों के बाहर ही प्रत्याशियों के समर्थक उनके चुनाव चिह्न आदि लेकर बैठ रहे और वोटरों से अपील करते रहे। कुछ जगह पुलिसकर्मी लोगों को दूर करते रहे।
3. मतदान के दौरान अपना प्रचार करने के लिए प्रत्याशियों ने अनोखे तरीके निकाले। कइयों ने बच्चों को चुनाव चिह्न देकर बूथों के बाहर खड़ा किया तो किसी ने पशुओं पर पोस्टर चस्पा कर दिए। एक प्रत्याशी का समर्थक तो ऊंट पर ही चुनाव चिह्न के पोस्टर चस्पा कर दिए।
4. चुनावी पार्टियों को पोलिंग बूथ पर रवाना करने से पहले उपायुक्त डॉ यश गर्ग ने निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए ग्रामीणों से खाना सहित अन्य सुविधाएं नहीं लेने के निर्देश दिए थे। लेकिन कुछ मतदान केंद्रों पर पोलिंग कर्मचारी तो कहीं पर पुलिस कर्मी गांवों के लोगों द्वारा दिया गया खाना खाते देखे गए। लेकिन कर्मचारियों व पुलिसकर्मियों की मजबूरी भी जुबां पर आ ही गई, उन्होंने कहा कि सरकार से तो खाना आता नहीं पेट तो भरना ही है। क्योंकि उनके लिए प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था नहीं की गई थी।
यह भी जानिए
-खोल में 321 और नाहड़ में 251 पंच निर्विरोध चुने गए थे। ऐसे में 415 पंच पदों के लिए चुनाव हुआ। 12 पंच पदों के लिए पढ़े लिखे लोग न मिलने से सीट खाली रह गई।
-कुल 104 ग्राम पंचायतों में 101 ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव हुए। तीन ग्राम पंचायत पहले ही निर्विरोध चुन ली गई थी। इनमें खोल की दो और नाहड़ की एक एक ग्राम पंचायत शामिल है। ऐसे में खोल में 56 और नाहड़ में 45 सरपंचों का चुनाव किया गया।
ब्लॉक समिति सदस्य के लिए 205 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद
रेवाड़ी। बावल और रेवाड़ी के बाद दूसरे चरण के खोल और नाहड़ ब्लॉक समिति सदस्य के लिए चुनावी मैदान में उतरे 205 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला भी जनता ने ईवीएम का बटन दबाकर किया। नाहड़ में 23 और खोल में 25 सदस्यों के लिए मतदान हुआ। खोल ब्लॉक में कुल 110 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें 57 पुरुष और 53 महिलाएं शामिल हैं। जबकि नाहड़ ब्लॉक में कुल 95 प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई है। इनमें 55 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल है। इनके साथ ही इन दोनों ब्लॉक में आने वाले जिला परिषद के वार्डों के लिए चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की किस्मत भी ईवीएम में बंद हो गई है। इनके चुनावों का फैसला 28 जनवरी को आएगा।