रेवाड़ी। सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों को पांच से छह महीने तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इसकी वजह एक ही डॉक्टर पर अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी होना है। इसकी वजह से मरीजों को जांच के लिए लंबी तारीखें दी जा रही हैं, जिससे उनका समय पर उपचार प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को निजी केंद्रों में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
वर्तमान में अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी केवल एक डॉक्टर पर है। उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच के साथ अन्य प्रशासनिक और चिकित्सकीय व्यवस्था की भी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या के मुकाबले जांच की क्षमता कम पड़ रही है। इससे अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों का लंबी तारीखें दी जा रही हैं।
करीब एक वर्ष पहले अस्पताल में कार्यरत एक अन्य डॉक्टर को कोरियावास मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। इसके बाद से अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवाओं का पूरा भार एक ही डॉक्टर पर आ गया। समय से अल्ट्रासाउंड नहीं होने से मरीजों का इलाज समय से नहीं हो रहा है।
मामले में विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर के प्रतिनियुक्ति पर जाने का खामियाजा रेवाड़ी की जनता को नहीं भुगतना चाहिए। अस्पताल में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। मरीजों को समय पर जांच व उपचार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रतिनियुक्ति पर गए डॉक्टर की वापसी सुनिश्चित कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग से बात की जाएगी। अस्पताल में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती के प्रयास किए जाएंगे।
कमेटी के निरीक्षण में मिली थी खामियां
हाल ही में हरियाणा विधानसभा की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा समिति ने सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था तो कई गंभीर खामियां और बदहाली खुलकर सामने आई थीं। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में सबसे बदतर स्थिति अल्ट्रासाउंड और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर मिली है, जिस पर कमेटी ने कड़ा रुख अपनाया है।