रेवाड़ी। औद्योगिक विकास और रोजगार के बढ़ते अवसरों के साथ रेवाड़ी में यातायात और यात्रियों का दबाव एक दशक में बढ़ा है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाईं। धारूहेड़ा और बावल के औद्योगिक क्षेत्रों में 1500 से अधिक इकाइयों में 80 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलने के बाद आसपास के जिलों और राजस्थान सीमा से रोजाना रेवाड़ी पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ रही है।
यात्रियों की संख्या बढ़ाने के बाद भी रोडवेज के बेड़े में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। नतीजा यह है कि सुबह-शाम व्यस्त रूटों पर बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती, जबकि दोपहर में कई रूटों पर बसों की संख्या कम होने से यात्रियों को निजी बसों, ऑटो और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
जिले के साथ पूरे दक्षिणी हरियाणा के विकास के लिए परिवहन सुविधाओं का विस्तार जरूरी हो गया है। वहीं, पड़ोसी जिलों के डिपो के बेड़े में भी बसों की पर्याप्त संख्या नहीं है। रेवाड़ी में अभी रोडवेज के पास 155 बसें हैं जबकि 177 बसें निर्धारित हैं। रोजाना 22 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। 20 लाख से अधिक की आय होती है। एक दशक पहले यात्रियों की संख्या करीब 17000 थी।
रेवाड़ी में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं। औद्योगिक नगरी के रूप में विकसित हो रहे जिले के धारूहेड़ा व बावल में 1500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं। इन इकाइयों में 80 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है।
रेवाड़ी के साथ बावल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने से महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, झज्जर, मेवात सहित राजस्थान सीमा से सटे क्षेत्रों के युवाओं का रेवाड़ी की ओर आवागमन लगातार बढ़ रहा है।
स्थिति यह है कि कई व्यस्त रूटों पर सुबह और शाम के समय बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती। दूसरी ओर दोपहर के समय कई रूटों पर बस सेवाएं अपेक्षाकृत कम रहती हैं। ऐसे में यात्रियों को निजी बसों, ऑटो और अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
डिपो में स्वीकृत 221 पदों में से 120 पद रिक्त
रेवाड़ी डिपो में कर्मचारियों की कमी से यातायात व्यवस्था के साथ ही विभागीय कामकाज बाधित हो रहा है। डिपो में विभिन्न श्रेणियों के कुल 221 स्वीकृत पदों में से 120 पद रिक्त हैं। आधे से अधिक पदों पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर तैनाती नहीं होने से जिम्मेदारों को व्यवस्था बनाने में परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे अधिक कमी निरीक्षण और पर्यवेक्षण से जुड़े पदों पर है।उपनिरीक्षक के स्वीकृत 30 पदों में 7 भरे हैं, जबकि 23 पद खाली हैं। निरीक्षक के 20 में से पांच पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं और 15 रिक्त हैं।मुख्य निरीक्षक का एकमात्र पद भी रिक्त है। वहीं, स्टेशन सुपरवाइजर के दोनों पद और डीजल पंप लिपिक के तीनों पद रिक्त हैं। सहायक कैशियर के दो, कैशियर के दो और स्टोर कीपर के तीन पद भी खाली हैं। तकनीकी स्टाफ की स्थिति चिंताजनक है। तीन स्वीकृत हेड मैकेनिक पदों में एक, छह टीवीएफ पदों में चार और हेड इलेक्ट्रीशियन का एक पद रिक्त है। 37 स्वीकृत हेल्पर पदों में 19 नियमित कर्मचारी हैं और 18 पद रिक्त हैं। चौकीदार के 15 पदों पर नियमित कर्मचारी नहीं हैं। स्टोर मैन के 14 पदों में केवल तीन नियमित कर्मचारी हैं और समायोजन के बाद 11 पद रिक्त हैं। माली के चारों, स्वीपर के 27 में से 22 तथा वाटर कैरियर के तीनों पदों में भी नियमित कर्मचारियों की कमी दर्ज है।
नई सुविधाओं का निर्माण कछुआ गति से:
बढ़ती जरूरत के बीच रेवाड़ी डिपो के नए भवन, धारूहेड़ा बस स्टैंड के निर्माण का कार्य भी गति नहीं पकड़ पा रहा है। इन परियोजनाओं के जल्द पूरा होने से बस संचालन को बेहतर करने, यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और नए रूटों पर बस सेवाएं बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कोसली सब डिपो के लिए टेंडर लग चुका है।
वर्जन:
जिले में रेवाड़ी सब डिपो का नया आधुनिक भवन व धारूहेड़ा बस स्टैंड के निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद जिले में परिवहन सुविधाओं में विस्तार होगा।-निरंजन शर्मा, महाप्रबंधक राज्य परिवहन रेवाड़ी?