संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। ग्रामीणों को राहत देने और नियोजित विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने गांवों में अनधिकृत निर्माणों को नियमित करने की नीति लागू की है। यह नीति हरियाणा ग्राम साझा भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 की धारा 5 में संशोधन के बाद लागू की गई है। इससे ग्रामीणों को राहत मिलेगी।
आयुक्त एवं सचिव, विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
उन्होंने धारा 5ए में संशोधन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब ग्राम पंचायतों को राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति से गैर-कृषि योग्य शामलात भूमि को उन ग्रामीणों को बिक्री के माध्यम से हस्तांतरित करने का अधिकार देता है, जिन्होंने 31 मार्च 2004 को या उससे पहले मकान बनाए हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसा नियमितीकरण निर्मित क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत तक के मकानों और संबंधित खुले स्थानों पर लागू होगा, जो कुल मिलाकर 500 वर्ग गज से अधिक नहीं होना चाहिए।
भूमि यातायात या सार्वजनिक उपयोगिताओं में बाधा नहीं डालनी चाहिए, या तालाबों, जल निकायों या रास्तों व फिरनी के लिए आरक्षित नहीं होनी चाहिए। बिक्री बाजार दर से कम दर पर नहीं की जाएगी, जिसका निर्धारण एक निर्धारित तरीके से किया जाएगा और इस निर्धारण के नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाएगा।
डॉ. अग्रवाल ने उन घटनाओं पर चिंता व्यक्त की जहां नए प्रावधानों के तहत भूमि खरीदने की निवासियों की इच्छा के बाद बेदखली याचिकाओं का कड़ा विरोध किया जाता है या इन अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए बलपूर्वक कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि इस तरह की कार्रवाई एक कल्याणकारी राज्य के व्यापक जनहित में नहीं है ।