शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूलों के दाखिले के लिए आवेदन करने वाले बच्चों की सोमवार को लिस्ट नहीं लगने से नाराज अभिभावकों ने सोमवार को रेवाड़ी बीईओ ऑफिस पहुंचकर जमकर बवाल काटा। अभिभावकों ने सरकार एवं शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यहां कर्मचारियों को लगभग दो घंटे तक बंधक बनाए रखा, वहीं लगभग ढाई घंटे बाद बीईओ सुभाष चंद के पहुंचने पर महुिलाओं ने उनकी गाड़ी को घेरकर जमकर खरी-खोटी सुनाई।
महिलाएं अपने बच्चों के एडमिशन को लेकर इतनी व्याकुल थी कि उनकी आंख भर आई। डीईओ से कहा, साहब यहां पर आप नहीं सुनते और स्कूल में अध्यापक बच्चों को पीटकर भगा देते हैं। इधर बीईओ ने कहा कि लिस्ट तैयार थी, लेकिन उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद रोकी गई है।
गौरतलब है कि शिक्षा विभाग ने सोमवार की सुबह दस बजे स्कूलों में बच्चों के दाखिले को लेकर लिस्ट जारी करने का समय अभिभावकों को दे रखा था। अभिभावक दस बजे पहुंचे तो शाम तीन बजे का समय दे दिया गया। तीन बजे भी लिस्ट नहीं लगने से महिलाओं का गुस्सा फूट गया। अकेले रेवाड़ी खंड में ही 1800 सौ आवेदन आए हुए हैं।
----------
मासूम बच्चियां बोली अंकल एडशिन करा दो टीचर पीटते हैं.
नई बस्ती स्थित खंड रेवाड़ी कार्यालय में अपने अभिभावकों के साथ लिस्ट में स्कूल का नाम देखने पहुंची पहली कक्षा की छोटी बच्चियां श्रेया, ट्विंकल एवं दीपांश अपने दाखिले को लेकर परेशान थी। बाईओ आफिस में कर्मचारियों से बोली अंकल एडमिशन करा दो, टीचर स्कूल से पीटकर जाने के लिए कह देते हैं। जब ये मासूम यह कह रहे थे तो सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की हकीकत बयां हो रही थी। एक ओर सरकार शिक्षा का अधिकार एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के प्रचार-प्रसार के लिए करोडों रूपये पानी में बहा रही है,वहीं हकीकत यह है कि जरूरतमंद बच्चियों को चिलचिलाती धूप में कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
------
कर्मचारी बोले उपर से आदेश है,विधायक के कपड़े फाड़ो
शाम तीन बजे बीईओ कार्यालय में लिस्ट जारी नहीं होने पर काफी संख्या में पहुंची महिला अभिभावकों ने यहां पर मौजूद कर्मचारियों को घेरकर लिस्ट जारी करने की मांग की। कर्मचारियों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनके नहीं मानने के बाद कर्मचारी बोले, उच्च अधिकारियों के आदेश होंगे तभी लिस्ट जारी होगी। जाकर विधायक के कपड़े फाड़ो। विधायक सरकार में हैं, वह ही शायद कुछ कर सकते हैं।
बीस को लिस्ट जारी नहीं हुई तो बैठेंगे डीईओ ऑफिस पर धरने पर
अभिभावक ज्योति, सुमन,आशा,स्नेहलता एवं आरती आदि महिलाओं ने कहा कि जब सरकार उनके बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन ही नहीं दिला सकती तो ऐसी स्कीम का क्या फायदा। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग की ओर से बीस अप्रैल तक लिस्ट जारी नहीं की तो वह अपने बच्चों के साथ लेकर डीईओ ऑफिस पर धरने पर बैठ जाएंगी।
बधंक बनाए कर्मचारियों को छुड़ाने के लिए बुलानी पड़ी पुलिस
लिस्ट जारी करने की जिद करने पर अड़ी महिलाओं ने कर्मचारियों को पहले तो एक घंटे तक कार्यालय के अंदर ही बंधक बनाए रखा। एक बार तो महिलाओं ने कार्यालय का गेट तक बंद कर दिया। मामला शांत होता देख जब कुछ कर्मचारी अपने वाहन लेकर निकलने लगे तो महिलाएं वाहनों के सामने खड़ी हो गई। शिक्षा विभाग की ओर से इसकी सूचना पुलिस की दी गई। सूचना पाकर गोकल गेट चौकी इंचार्ज रामसिंह मौके पर पहुंचे तथा कर्मचारियों को छुड़वाया। बीईओ सुभाष चंद की गाड़ी को भी महिलाओं ने घंटे से ज्यादा समय तक घेरे रखा। इसके बाद बीईओ ने उच्च अधिकारियों से बात की तथा अभिभावकों को सभी मांगे लिखत में देने के लिए कहा। अभिभावकों का मंाग पत्र लेने के बादी ही अभिभावक वहां से गए।
-----
वर्जन
हमारी ओर से लिस्ट तैयार कर ली गई थी। लेकिन उच्च अधिकारियों द्वारा लिस्ट जारी नहीं करने के आदेश के बाद लिस्ट को नहीं लगाया गया।
-सुभाष चंद्र, बीईओ, खंड रेवाड़ी।