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Rewari News: बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए 20 फीसदी तक स्कूल फीस बढ़ाने से अभिभावक नाराज

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अभिभावक जितेंद्र यादव
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रेवाड़ी। निजी स्कूल मनमानी कर हर साल फीस में वृद्धि करते हैं। इस बार भी यही हालात देखने को मिले हैं। बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए 15 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने से अभिभावकों में नाराजगी है। शिक्षा विभाग के नियमों के तहत, किसी भी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले फाॅर्म-6 भरकर विभाग को सूचित करना जरूरी है।
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इसके बावजूद जिले के कई निजी स्कूलों ने इस नियम की अनदेखी करते हुए सीधे फीस बढ़ा दी। आंकड़ों के अनुसार प्राइमरी के 31, मिडिल के 39, हाईस्कूल के 46 और सीनियर सेकंडरी के 148 स्कूलों ने ही फाॅर्म-6 जमा किया है जबकि जिले में करीब 700 निजी विद्यालय हैं। बाकी स्कूलों ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन बिना किसी पूर्व सूचना के बढ़ी हुई फीस के नोटिस थमा देते हैं। कुछ स्कूलों की ओर से फीस जमा न करने पर बच्चों का नाम काटने या परीक्षा में बैठने से रोकने की चेतावनी भी दी जा रही है। इससे अभिभावक मानसिक और आर्थिक दबाव में आ गए हैं।
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अभिभावकों का कहना है कि हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जाती है लेकिन सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं होता। उशिक्षा के नाम पर लगातार आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, फीस वृद्धि पर नियंत्रण लगाया जाए और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए ताकि राहत मिल सके।

ऑनलाइन पोर्टल पर ही स्वीकार होंगे आवेदन

विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फाॅर्म-6 की अर्जी लिंक के माध्यम से डाउनलोड करके भरनी होगी। स्कूलों को अपने पुराने एमआईएस यूजरनेम और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करना होगा। फाॅर्म-6 स्कूल केवल पंजीकरण, दाखिला (पहली, छठी, नौवीं और 11वीं), बोर्ड परीक्षा और फार्म में घोषित समग्र फीस ही ले सकेंगे। परिवहन, हॉस्टल, खाना और टूर जैसी सुविधाओं के लिए फीस केवल उन्हीं छात्रों से ली जाएगी जो इन सेवाओं का विकल्प चुनेंगे।

अभिभावक बोले-हर साल बढ़ती फीस से बढ़ा आर्थिक बोझ, नियंत्रण की मांग
अभिभावक अशोक बेरवाल ने बताया कि उनके दो बच्चे तीसरी और पांचवीं कक्षा में एक निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि हर साल बढ़ती फीस से परिवार की आर्थिक स्थिति पर काफी बोझ पड़ रहा है इसलिए फीस वृद्धि पर नियंत्रण जरूरी है।
अभिभावक विकास ने कहा कि निजी स्कूल बिना पूर्व सूचना के ही फीस बढ़ाने के नोटिस दे देते हैं, जिससे अभिभावकों को मजबूरी में बढ़ी हुई फीस भरनी पड़ती है। हर साल की समस्या है।
अभिभावक जितेंद्र यादव ने बताया कि कुछ स्कूल फीस बढ़ाने के बाद दबाव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर फीस जमा नहीं करने पर बच्चों का नाम काटने या परीक्षा में बैठने से रोकने की चेतावनी दी जाती है जिससे अभिभावकों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ता है।
अभिभावक प्रद्युम्न राजपूत ने कहा कि उनके दो बच्चे नौवीं और दसवीं कक्षा में पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ती फीस के कारण उनकी आधी तनख्वाह बच्चों की पढ़ाई पर ही खर्च हो जाती है। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस मामले में सख्त कदम उठाने की मांग की।

वर्जन :
फॉर्म-6 भरना सभी निजी स्कूलों के लिए अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल बिना अनुमति फीस बढ़ाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को चाहिए कि वे इस प्रकार के मामलों की शिकायत विभाग को दें ताकि जांच कर उचित कदम उठाए जा सकें। -बिजेंद्र हुड्डा, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।

अभिभावक जितेंद्र यादव

अभिभावक जितेंद्र यादव

अभिभावक जितेंद्र यादव

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