सरकारी स्कूलों में गिरती एनरोलमेंट की संख्या से चिंतित जिला शिक्षा विभाग एनरोलमेंट की संख्या बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों की मदद लेगा। परीक्षाओं के दौरान पंचायतों के साथ रणनीति बनाकर नकल पर रोक लगाने वाली रणनीति सफल होने के बाद शिक्षा विभाग ने इस फार्मूले को विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों तक लाने के लिए अपनाने की योजना तैयार कर ली है। पूरे प्लान को क्रियान्वित करने के लिए जिले के सभी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल एवं ग्राम पंचायतें दो अप्रैल को गांव मंदोला के राजकीय विद्यालय में मंथन के लिए जुटेंगे। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों क्वालिफाइड अध्यापक होने के बावजूद खराब प्रबंधन के चलते परिजन भारी भरकम फीस देकर प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों के भविष्य को खोज रहे हैं।
-गिरते एनरोलमेंट को सुधारने के लिए की जा रही है कवायद
जिले में प्राइमरी 411, मडिल 97,हाईस्कूल 60 एवं 88 सीनियर सेकेंडरी सहित कुल 656 स्कूल हैं। शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो 2014-15 एवं 2015-16 के शैक्षणिक सत्रों की तुलनात्मक अध्ययन से पता लगता है कि सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट कम होता जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो खराब प्रबंधन व्यवस्था इसका सबसे बड़ा कारण है।
सरकारी स्कूलों में क्वालिटी अध्यापक होने के बावजूद रिजल्ट में हम फिसड्डी रह जाते हैं। इसी से सीख लेते हुए शिक्षा विभाग ने इस सत्र में एनरोलमेंट बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपलों से चर्चा करने के बाद यह सामने आया कि परीक्षाओं के दौरान पंचायतों से मिले योगदान का फायदा एनरोलमेंट बढ़ाने में लिया जा सकता है।
इसका सबसे बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार के पढ़ी लिखी पंचायत के फैसले का यह प्रभाव है। प्रिंसिपलों की मानें तो पंचायतें खुद आकर स्कूलों में एनरोलमेंट बढ़ाने में सहयोग की बात कर रही है।
इस सत्र में हमारा पहला काम एनरोलमेंट बढ़ाना है। सही काम में जिसकी भी मदद मिल जाए अच्छा है। पंचायते स्वयं आगे आकर सहयोग करने को तैयार हैं,इसलिए उनकी मदद ली जाएगी। स्कूलों में प्रबंधन व्यवस्था सुधारने पर भी काम चल रहा है।
-धर्मबीर बल्डोदिया, शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी