ओवरलोड वाहनों से वसूली कर उन्हें पास कराने का खेल रेवाड़ी में भी चल रहा है। इसका खुलासा चरखी दादरी में पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में किया गया है। पुलिस द्वारा काबू किए गए रोहतक निवासी दो आरोपियों ने पूछताछ में कुबूल किया कि रेवाड़ी में सतेंद्र नामक युवक उनके नेटवर्क को संभाल रहा था। इस खुलासे के बाद यहां भी हड़कंप मचा हुआ है। जिले में हाईवे एवं शाम को शहर की सड़कों से सरेआम निकलने वाले ओवरलोड डंपरों को देेखकर भी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि जिले के आरटीए कम एडीसी ने कई बार ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूल किया है। इसके बावजूद भी हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
आठ थानों की सीमा से होकर निकालते हैं ओवरलोड डंपर
ओवरलोड डंपर चालक राजस्थान के कोटपुतली व नारनौल के समीप होने वाले खनन से रोड़ी, बजरी व डस्ट लेकर नोयडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद व मेवात की ओर जाते हैं। इन डंपर चालकों को रेवाड़ी जिले से होकर गुजरना पड़ता है। इस दौरान रास्ते आठ पुलिस थानों व आरटीए की टीम का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन इनको चकमा देकर ये चालक आसानी से अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं। हालांकि ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की पावर पुलिस के पास नहीं है। इनके खिलाफ केवल आरटीए ही कार्रवाई कर सकते हैं।
वसूली नहीं देने पर कराते थे चालान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सक्रिय कथित दलालों से ओवरलोड वाहन चालकों की सेटिंग नहीं होती है तो वे आरटीए कार्यालय के कर्मचारियों से ओवरलोड वाहन का चालान कराने की धमकी देते हैं। ये कथित दलाल शाम होते ही हाईवे पर पहुंच जात हैं तथा आगे का रास्ता क्लियर होने की सूचना देते हैं।
करीब छह माह पूर्व आरटीएक ने पकड़ा था गिरोह
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले की सीमा से होकर निकलने वाले ओवरलोड वाहनों की संख्या एक हजार से भी अधिक है। इन वाहनों में स्थानीय लोगों के अलावा बाहरी जिले के लोगों के वाहन शामिल हैं। इन वाहनों को सुरक्षित निकालने के लिए भी जिले में कई गिरोह सक्रिय हैं। आरटीए कार्यालय की लोकेशन लेकर ओवरलोड वाहनों के सुरक्षित निकालने के लिए ठेेका लेते थे। करीब छह माह पूर्व भी आरटीए ने इस मामले में एक आरोपी को काबू भी किया था।
विजिलेंस के मामला दर्ज करने के बाद कर रहे हैं नौकरी
आरटीए व लघु सचिवालय में ऐसे कई कर्मचारी हैं जिन पर आरटीए कार्यालय में तैनाती के समय भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज कर गिरफ्तार उन्हें भी किया गया था। लेकिन उनमें से कुछ कर्मचारी आज भी लघु सचिवालय व आरटीए कार्यालय में नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिले में ओवरलोड वाहनों को लेकर कड़ी पाबंदी की गई है। कोई भी गिरोह सक्रिय नहीं है। ओवरलोडिंग में चालान करने में भी जिला अव्वल है। इसके बावजूद भी ओवरलोड की कोई शिकायत आती है तो अधिकारियों के दिशा निर्देश पर कार्रवाई की जाती है।
- सूरत सिंह, सचिव आरटीए रेवाड़ी।