अन्य बिरादरी ने भी अपना समर्थन दिया
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गांव प्राणपुरा में जाट आरक्षण के लिए चल रहे धरने के चौथे दिन बुधवार को जाटों को अन्य बिरादरी के लोगों ने भी धरना स्थल पहुंचकर अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया। बुधवार को समर्थन देने वालों में गुर्जर एवं एससीएसटी समाज के लोग शामिल थे। जाट आंदोलनकारियों की ओर से आंदोलन को शांतिपूर्वक चलाने की घोषणा के बाद अन्य समाज के लोग भी जाटों के धरने पर पहुंच रहे हैं।
इधर बुधवार को जाट बाहुल्य गांव के लोगों ने भी प्राणपुरा पहुुंचकर धरने पर बैठे आंदोलनकारियों की हौसला आफजाई की। लू के थपेड़ों के बीच अपने बच्चों के भविष्य की लड़ाई लड़ रहे आंदोलनकारियों दिन भर हुक्का की गुड़गुड़ाहट के साथ चौसर की बाजी लगाते रहे। इधर प्रशासन भी किसी ढिलाई के मूड में नहीं है। पुलिस-प्रशासन भी गर्मी से बेहाल सुरक्षा बलों से पल-पल की अपडेट लेने के लिए राणौली रेलवे ट्रैक के समीप स्थित जाट भवन में पहुंचते रहे।
काम छोड़कर धरने पर बैठने को हैं मजबूर
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला महासचिव जीतराम लौर ने कहा कि यदि सरकार की मंशा ठीक होती तो आरक्षण को कोर्ट के पचड़े से बचाने के लिए संविधान की नौवीं सूची में शामिल कर सकती थी। उन्होंने कहा कि लेकिन सरकार ने कांग्रेस की तर्ज पर ही जाटों को आरक्षण से वंचित रखने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब यूपी एवं राजस्थान के जाटों को आरक्षण मिल सकता है तो हरियाणा के जाटों को क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी पार्टी से जुड़ेे सांसद पर कोई कार्रवाई नहीं की जबकि जाट समुदाय के सैकड़ों लोगों पर देशद्रोह के मुकदमे दर्ज कर दिए।
इन लोगों ने दिया अपना समर्थन
जीतराम लौर ने कहा कि बुधवार को समर्थन देेने पहुंचने वाले लोगों में गुर्जर समुदाय से जैतपुर निवासी बनवारी लाल, एससी समाज से दुल्हेड़ा खुर्द निवासी सुबेदार रतिराम, पनवाड़ से निहाल सिंह मुख्य रूप से शामिल थे। उन्होंने कहा कि बुधवार को जिले के जाट बाहुल्य गांव के लोगों ने भी प्राणपुरा आकर आंदोलन का अपना समर्थन दिया। जिनमें पनवाड से हीरालाल, रसियावास से देवी प्रधान, हरचंदपुर से धर्मचंद, कालडावास से लक्खी, किशनपुरा से रामजीलाल एवं महाबीर सहित अन्य गांव के लोग उपस्थित थे।