संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) के नाम पर किताबों में फर्जीवाड़े की शिकायत पर वीरवार को प्रशासन ने कार्रवाई की। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने शहर के बस अड्डा के पास किताबों की दुकानों पर छापा मारकर काफी मात्रा में एनसीईआरटी के नाम पर बेची रही दूसरी किताबें पकड़ी। इसमें नौवीं, दसवीं, 11वीं और 12वीं की विभिन्न विषयों की 161 किताबें पकड़ी हैं। कार्रवाई की सूचना मिलते ही विभिन्न किताबों की दुकानों पर हड़कंप मच गया। कई दुकानदार दुकानें बंद करके चले गए। इसके अलावा शहर के अन्य स्थानों पर भी दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।
वैसे तो एनसीईआरटी के नाम पर दूसरी किताबें बेचने वालों पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की कार्रवाई की सभी सराहना कर रहे हैं, लेकिन जिन लोगों ने पहले किताबें खरीद ली उनका क्या होगा। अब यह किताबें न तो वापस होंगी और न रुपये मिलेंगे। घटिया कागज और स्याही से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर भी आशंका बढ़ गई है। इस पर कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है। काफी संख्या में अभिभावक किताबें खरीद चुके हैं। नया शैक्षणिक सत्र आरंभ हुए छह दिन बीत चुके हैं।
पिछले साल भी पकड़ी थीं किताबें
9 अप्रैल 2022 को मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की टीम ने शहर के बस स्टैंड के पास अपना बाजार में किताबों की दुकानों पर आपूर्ति देने आई एक वैन से एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबें पकड़ीं थी। साथ ही चालक को काबू किया था। पूछताछ में चालक ने टीम को बताया कि वह रोहतक की एक फर्म में चालक की नौकरी करता है और रेवाड़ी में किताबों की सप्लाई देने आया था। जानकारी मिलने के बाद एनसीईआरटी के अधिकारियों ने शिक्षा विभाग रोहतक के अधिकारियों से तालमेल स्थापित कर के रोहतक की फर्म पर भी छापा मारकर बड़ी मात्रा में नकली किताबें बरामद की थी।
जहरीले कैमिकल से की जाती हैं तैयार
जानकारों का कहना है कि पायरेटिड (डूप्लीकेट) पुस्तकें यूं तो असली की तरह होती हैं, लेकिन ये किताबें विशेष प्रकार के कैमिकल से तैयार की जाती हैं। यह कैमिकल न केवल जहरीला होता है बल्कि बच्चों के लिए खतरनाक होता है।