रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम को बीमा राशि मृतक की नॉमिनी पत्नी को देने का आदेश दिया है। आयोग ने मृतक की पत्नी गीता को दो लाख में से केवल एक माह की किस्त 732 रुपये काटने के बाद 9 फीसदी ब्याज के सहित देने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त 20 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और 11 हजार वाद खर्च देना होगा।
जीवन बीमा निगम ने राशि इसलिए देने से मना कर दिया था, क्योंकि बीमा की किस्त एक माह के भीतर समय पर अदा नहीं की गई थी।
गांव बुडौली निवासी गीता देवी के पति संजय कुमार ने एक पॉलिसी जीवन लक्ष्य 10 अगस्त 2018 को दो लाख रुपये की ली थी। इसकी 732 रुपये प्रतिमाह की किस्त अदा करनी थी, लेकिन अचानक संजय कुमार की 27 मार्च 2021 को करंट लगने से मौत हो गई थी। इसके लिए जब भारतीय जीवन बीमा निगम से मृतक की बीमा राशि मांगने के लिए आवेदन किया गया तो कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम की राशि देने से मना कर दिया कि समय के अनुसार किस्त एक महीने की नहीं दी गई है।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा और राजेंद्र प्रसाद ने पाया कि मामले में एक माह की किस्त अदा करने के लिए एक माह का ही ग्रेस पीरियड दिया गया था। ग्रेस पीरियड की अवधि में संजय कुमार की मृत्यु हुई थी। जबकि पॉलिसी जमा करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय ग्रेस पीरियड दिया जाता है, लेकिन इसी दौरान मृत्यु होने के कारण मृतक अपनी बीमा राशि की पॉलिसी समय पर अदा नहीं कर सका, जोकि ग्रेस समय के अंदर की जानी थी।