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दस दिन में केवल ग्यारह सैंपल, कार्रवाई कोई नहीं

Tue, 10 Nov 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
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दीपावली पर करोड़ों रुपये का मिठाई का कारोबार होता है, वहीं डिमांड का फायदा उठाकर मिलावट खोर भी जमकर अपना खेल खेलते हैं। इसका खामियाजा जिले की नौ लाख की आबादी को भरना पड़ता है। प्रशासन की जिम्मेदारी लोगों तक गुणवत्ता का खाद्य-पदार्थ पहुंचाने की होती है, लेकिन प्रशासन किस तरह से नींद में सोया है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले में पिछले दस दिन में केवल ग्यारह सैंपल ही भरे गए हैं। गंभीरता यह भी है कि जहां प्रशासन को मिठाइयों के ज्यादा सैंपल लेने थे, वहीं उनके द्वारा चाय पत्ती तक के सैंपल लिए गए। इसी के साथ जब तक सैंपल रिपोर्ट आती है, मिलावट का यह जहर लोगों के खून में मिल चुका होता है। रेवाड़ी शहर में ही अकेले सैकड़ों मिठाई की दुकान हैं, वहीं दीपावली पर इतनी अस्थायी दुकानें देखने को मिलती हैं। मिठाई खरीदना शुभ माना जाता है, इसलिए प्रत्येक घर में मिठाई जरूर पहुंचती है। इसको भुनाने के लिए ही मिलावट खोर सक्रिय हो जाते हैं, तथा रसगुल्ले, बर्फी और अन्य उत्पादों में जमकर मिलावट की जाती है। वहीं विभाग खानापूर्ति करने के लिए सैंपल तो भरता है, लेकिन उसकी रिपोर्ट महीनों बाद आती है, जब तक वह मिलावटी माल
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पूरी तरह से बिक चुका होता है।

शहर की आबादी डेढ़ लाख, सैंपल तीन
डेढ़ लाख की आबादी वाले शहर में गली-मोहल्लों से लेकर नामचीन मिठाइयों की दुकानें हैं। इसी के साथ कई मोहल्लों में मिठाइयों की फैक्ट्री भी चल रही है लेकिन प्रशासन की गंभीरता का यह आलम है कि एक से लेकर दस नवंबर तक मात्र तीन सैंपल ही भरे गए हैं। इनमें एक पनीर और दो रसगुल्लों के हैं लेकिन इन सैंपलों की रिपोर्ट जब तक आएगी, दुकानदार इस माल को बेच चुके होंगे।

बावल-कोसली व धारूहेड़ा में केवल आठ सैंपल
बीते दस दिन में बावल-कोसली व धारूहेड़ा में भी विभाग ने लचर व्यवस्था का ही प्रमाण दिया है। इन तीनों स्थानों पर रहने वाली आबादी दीपावली पर कितना जहर खाएगी इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। धारूहेड़ा में तो अनेक डेवलपर्स के चलते अनेक फ्लेटों का निर्माण हुआ है, जिसमें अनेक प्रदेशों से आई आबादी रहती है। लेकिन उनके स्वास्थ्य के ख्याल को प्रशासन ने राम-भरोसे छोड़ दिया गया है।
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खुलेआम खुले में बिक रही हैं मिठाइयां
प्रशासन की नाक तले ही दुकानदार खुले में मिठाइयां बेचने में लगे हुए हैं। एक ओर पहले से ही मिलावट खोरों का खेल, दूसरी ओर सड़कों से उडने वाली मिट्टी व मक्खियों ने मिठाइयों को खाने लायक नहीं छोड़ा है। नाईवाली चौक, बावल चौक, झज्जर चौक व बस स्टैंड पर खुले में बिकती मिठाइयों को देखा जा  सकता है। सकुर्लर रोड़ पर यह आलम है तो गली-मोहल्लों का क्या हाल होगा आसानी से समझा जा सकता है।
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