सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ऑनलाइन इफ्लुएंट मॉनिटरिंग डिवाइस लगाने के लिए टेंडर जारी किया है। जारी टेंडर के अनुसार 16 एमएलडी, 8 एमएलडी और 6.5 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के आउटलेट पर ऑनलाइन वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।
इन डिवाइस के माध्यम से बीओडी, सीओडी, टीएसएस और पीएच जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर की लगातार निगरानी की जाएगी। इस कार्य पर करीब 54.7 लाख रुपये खर्च होंगे। इच्छुक एजेंसियों के लिए टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल निर्धारित की गई है।
अभी तक एसटीपी से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता की जांच समय-समय पर मैन्युअल रूप से की जाती थी जिससे निरंतर निगरानी संभव नहीं हो पाती थी। ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगने के बाद हर समय पानी की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सकेगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर तुरंत अलर्ट मिल सकेगा।
इस सिस्टम के लागू होने से प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। यदि ट्रीटमेंट के बाद पानी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो विभाग तुरंत सुधारात्मक कदम उठा सकेगा। इससे नदी, नालों और अन्य जल स्रोतों में प्रदूषित पानी जाने से रोका जा सकेगा। सरकार की जारी गाइडलाइन के हिसाब से अपग्रेड किया गया है।
जल गुणवत्ता बनाए रखना होगा आसान
बीओडी और सीओडी जैसे पैरामीटर पानी में मौजूद जैविक और रासायनिक प्रदूषण का स्तर बताते हैं जबकि टीएसएस पानी में घुले ठोस कणों की मात्रा को दर्शाता है। वहीं पीएच स्तर से पानी की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति का पता चलता है। इन सभी की नियमित निगरानी से जल गुणवत्ता बनाए रखना आसान हो जाएगा। इस योजना का उद्देश्य ट्रीट किए गए पानी की गुणवत्ता को नियंत्रित करना और पर्यावरण मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहर के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
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सिस्टम पर्यावरण और भविष्य की जल जरूरतों से है जुड़ा
ऑनलाइन इफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम सिर्फ एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं बल्कि शहर के पर्यावरण और भविष्य की जल जरूरतों से जुड़ा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी का सही तरीके से नियंत्रण न होने पर नालों और आसपास के जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ता है। कई बार ट्रीटमेंट के बाद भी पानी पूरी तरह मानकों पर खरा नहीं उतरता जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है। क्षेत्र पहले से ही पानी की कमी और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहा है। अगर गंदा या अधूरा ट्रीट हुआ पानी जमीन में जाता है तो यह भूजल को भी प्रदूषित कर सकता है। इस सिस्टम से साफ पानी सुनिश्चित कर इस खतरे को कम किया जाएगा।
डेटा रियल टाइम में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जा सकेगा भेजा
डेटा रियल टाइम में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जाता है। कई जगहों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का फोकस है कि ट्रीट किया हुआ पानी सिंचाई, इंडस्ट्री और अन्य उपयोग में लाया जाए लेकिन उसकी गुणवत्ता लगातार मानकों के अनुसार हो। यह डिवाइस पानी की गुणवत्ता को लगातार जांचता है।
वर्जन
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के आउटलेट पर ऑनलाइन वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इन डिवाइस के माध्यम से पैरामीटर की लगातार निगरानी की जाएगी।
वीपी चौहान, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग