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एक गांव ऐसा, जहां नहीं करता कोई धुम्रपान

Sat, 23 Jan 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
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धूम्रपान की हानियों से लोगों को जागरूक करने के प्रचार-प्रसार पर सरकार लाखों रुपये खर्च करती है। इसके बाद भी धूम्रपान छोड़ने वाले लोगों की संख्या कम रहती है।
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वहीं जिले के गांव टीकला में सदियों से गांव का कोई व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता। इसके अलावा वे रिश्तेदारों को भी धूम्रपान नहीं करने के लिए जागरूक करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्थान से सदियों पूर्व गांव में आए बाबा भगवान दास ने यहां के लोगों से धूम्रपान छोड़ने के लिए आह्वान किया था, तब से आज तक यहां कोई भी ग्रामीण तंबाकू को छूता तक नहीं है।

हालांकि उस समय क्षेत्र के गांव प्राणपुरा, राणौली व तिहाड़ा सहित कई गांवों के लोग धूम्रपान नहीं करते थे, लेकिन अब इन गांवों में तो लोगों ने धूम्रपान करना शुरू कर दिया है। वहीं टीकला के लोग ही धूम्रपान से दूर रहते हैं। गांव में बाबा की याद में ग्रामीणों ने बाबा भगवान दास का मंदिर बनाया हुआ है, जिस पर प्रतिवर्ष मेला भी लगता है।
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अभियान से बनी आस्था तो त्याग दिया धूम्रपान
जानकारी के अनुसार जिले की बावल विधानसभा क्षेत्र के राजस्थान से सटे गांव टीकला मेें राजस्थान के बहरोड़ से सदियों पूर्व एक भगवान दास नामक बाबा आए थे। उस समय राजस्थान से सटे पावटी, राणौली, तिहाड़ा, शाहपुरा प्राणपुरा सहित आसपास के गांव के लोग बहुत ज्यादा धूम्रपान करते थे।

इससे आए दिन ग्रामीणों की मौत होती रहती थी। इसके बाद बाबा भगवान दास ने सभी गांवों को तंबाकू मुक्त करनेे के लिए अभियान चलाया। इसमें वह पूरी तरह सफल रहे। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय उपरोक्त सभी गांवों के ग्रामीणों ने सभी प्रकार के नशे को बंद कर दिया था, लेकिन समय बीतने के साथ ग्रामीणों ने धूम्रपान शुरू कर दिया। वहीं टीकला गांव के ग्रामीण बाबा भगवान दास में आस्था रखते हुए आज भी धूम्रपान से दूरी बनाए हुए हैं।
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वर्जन-
गांव की नव नियुक्त सरपंच बिमला देवी का कहना है कि यह गांव के लिए गर्व की बात है कि यहां पर कोई भी व्यक्ति धूम्रपान नहीं करता है। उन्होंने बताया कि हम रिश्तेदारियों में जाकर भी उनको धूम्रपान नहीं करने से गांव में आई खुशहाली के किस्से सुनाते हैं।
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आज के समय युवाओं के अंदर धूम्रपान आदतों में शुमार हो चुका है, लेकिन टीकला गांव का एक भी युवक धूम्रपान करना तो दूर तंबाकू को छूता तक नहीं है।
-विक्रात टोकस,ग्रामीण,टीकला
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गांव की खुशहाली का कारण ही यहां के ग्रामीणों द्वारा धूम्रपान नहीं करना है। यह परंपरा सदियों पूर्व से चली आ रही है। इसे हमारी पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है।
-ओमबीर,ग्रामीण टीकला।
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यह बात सही है कि गांव टीकला के ग्रामीण धूम्रपान नहीं करते हैं। वे देश के अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का श्रोत है। धूम्रपान से लोग स्वयं तो बीमार रहते है। इसके अलावा अन्य लोग भी प्रभावित होते हैं।
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-डॉ. धमेंद्र, नोडल  अधिकारी, एंटी तंबाकू कार्यक्रम
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