रेवाड़ी। लॉकडाउन के कारण जिले के विभिन्न हिस्सों में फंसे मध्यप्रदेश के करीब 12 सौ श्रमिकों को लेकर वीरवार को पहली ट्रेन रेवाड़ी से शाम को 7 बजे प्लेटफार्म नंबर-1 से मध्यप्रदेश के सागर के लिए रवाना हुई। ट्रेन में सवार होते समय प्रवासी श्रमिकों के चेहरों पर न केवल सुकून था बल्कि घर लौटने की चमक साफ दिखाई दे रही थी।
हालांकि प्रशासन ने श्रमिकों को रवाना करने से पहले किसी भी तरह स्टेशन व शहर में भीड़ ना जुट जाए इसके लिए सब कुछ गुप्त रखा। किसी के कानों कान तक खबर नहीं लगी। इतना ही नहीं जो श्रमिक ट्रेन में भी सवार हुए उन्हें भी शाम 5 बजे ही पता चला कि उनकी घर वापसी हो रही है।
बता दें कि जिला में काफी संख्या में मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार, बंगाल, गुजरात व अन्य प्रदेश के श्रमिक रहते हैं। कोरोना वायरस के चलते लगाए लॉकडाउन में काफी संख्या में श्रमिक अपने घर भी लौट गए, लेकिन बड़ी संख्या बचे श्रमिक घर भेजे जाने की लगातार प्रशासन से मांग कर रहे थे। इसके लिए प्रशासन की तरफ से हेल्पलाइन नंबर 1950 व वेबसाइट जारी की गई थी, जिसके जरिए श्रमिक अपना रजिस्ट्रेशन करा सके। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने श्रमिकों को घर भेजने की भी तैयारी कर ली। पिछले दो दिनों से लगातार डीसी व एसपी स्टेशन का दौरा कर रहे थे। प्रशासन ने सबसे पहले मध्यप्रदेश के लोगों को घर भेजने की तैयारी के तहत ट्रेन का इंतजाम किया। रजिस्ट्रेशन कराने वाले करीब 1200 लोगों को पहले रोडवेज बसों के जरिए जैन स्कूल में बनाए गए शेल्टर होम में लाया गया और उसके बाद शाम करीब पौने 5 बजे उन्हें यहां से रोडवेज की 44 बसों में बैठा कर बारी-बारी स्टेशन पर पहुंचाया गया।
स्टेशन पर दिखी सोशल डिस्टेंसिंग
मध्यप्रदेश के श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन की तरफ से सोशल डिस्टेंसिंग की पूरी प्लानिंग की गई थी। रोडवेज की एक बस में सिर्फ 30 ही यात्रियों को सवार किया गया और उसके बाद स्टेशन पहुंचाया गया। स्टेशन पर भी सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बकायदा 6 फीट दूर खड़े होने के लिए स्थान बनाया गया था। एक-एक कर यात्रियों को ट्रेन की बोगी में बैठाया गया।
सागर के दिनेश अपनी पत्नी के साथ यहां पहुंचा। दिनेश ने बताया कि सरकार न सिर्फ उन्हें घर पहुंचा रही है, बल्कि रास्ते में खाने-पीने का इंतजाम भी कर रही है। सरकार के प्रयास से यहां फंसे हजारों श्रमिकों में घर पहुंचने की आस जगी है। यहां फंसे परेशानी झेल रहे कामगार हर हाल में अपने गांव पहुंचना चाहते हैं।
लॉकडाउन में मिले दर्द के बाद दूसरे प्रदेश जाने की तौबा
रोजी-रोटी के लिए प्रदेश जाने वालों को लॉकडाउन के दिनों में ऐसा दर्द मिला कि उन्होंने अब दोबारा दूसरे प्रदेश जाने से ही तौबा कर ली है। प्रदेश सरकार के प्रयास से वापस अपने घर जा रहे हैै। प्रवासी श्रमिकों के वीरवार को श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार होते समय से चेहरे पर संतोष दिखाई दिया। यह बयां करने के लिए काफी था कि उन्होंने प्रदेश में कितना संकट झेला है। प्रवासी श्रमिकों ने कहा कि अब घर पर रहकर ही रोजी-रोटी का जुगाड़ करेंगे।
घर पर ही करूंगा काम
रोजी रोटी की तलाश में मध्यप्रदेश के भोपाल से रेवाड़ी आए रामस्वरूप जिले के गांवों में मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर करते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन से सब उजड़ गया। जो पूंजी थी वह सवा महीने में खत्म हो गई। अब घर पर ही काम करूंगा, भले ही यहां खाली रखना पड़े।