शहर के गढ़ी बोलनी रोड पर छाया स्मॉग। संवाद
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रेवाड़ी। जिले में पिछले कई दिनों से वायु प्रदूषण कभी घट रहा तो कभी बढ़ रहा है। शुक्रवार को जिले का वायु गुणवता सूचकांक (एक्यूआई) 313 दर्ज किया गया। सुबह के समय फॉग छाया रहता है, जिससे अस्थमा रोगियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही आंखों में जलन की समस्याएं भी बढ़ने लगी है। इलाज करवाने के लिए नागरिक अस्पताल में अस्थमा रोगियों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल में आंखों के साथ दमा के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने लगी है। डॉक्टरों की ऐसे रोगियों को धूल, मिट्टी से बचना चाहिए। इसके साथ ही ऐसे रोगियों को इस प्रदूषित वातावरण में मास्क लगाने के लिए कहा गया है। इस प्रकार की सावधानियां बरतने से अस्थमा रोगियों को राहत मिलेगी।
जिले में पिछले करीब एक सप्ताह से एक्यूआई 190 से 403 तक दर्ज किया गया है। शुक्रवार को भी एक्यूआई 313 था। इस कारण लोगों को सांस लेने में अधिक परेशानी हो रही है। अस्थमा रोगियों के लिए यह बहुत ही खतरनाक साबित हो रहा है। वायु में अधिक प्रदूषण होने से नाक, कान, गला व एलर्जी के रोगों को भी बढ़ावा देता है। नागरिक अस्पताल में आम दिनों में लगभग 50 के आसपास अस्थमा के रोगी आते हैं लेकिन आजकल इनकी संख्या बढ़कर 200 से भी अधिक हो गई है। एलर्जी के रोगियों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
अस्थमा से बचाव के उपाय
अस्थमा रोगियों को धूल, मिट्टी या खुले वातावरण से बचना चाहिए। यदि सांस फूलने लगे तो परिश्रम का काम नहीं करना चाहिए। धूम्रपान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा ठंडे स्थान से तथा ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इस समय प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है, ऐसे में रोगियों को मास्क लगाना चाहिए।
वातावरण में प्रदूषण अधिक होना अस्थमा रोग को बढ़ावा देता है। ऐसे मौसम में आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ जाती है। लोगों को आंखों के बचाव के लिए चिकित्सकों से सलाह लेते रहना चाहिए। इसके साथ ही आंखों को पानी धोते रहना चाहिए।
-डॉ कंचन, नेत्ररोग विशेषज्ञ