ऑक्सीजन समय पर नहीं मिलने के चलते सात मौतों के आरोपों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है। अब निजी अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन के आवंटन के लिए बनाई गई कमेटी द्वारा अप्रूवल गंभीर कोरोना मरीजों की सांसों के लिए संकट बन गया है।
निजी अस्पतालों को इन इंजेक्शन की डोज लेने के लिए पहले स्वास्थ्य विभाग के पास जरूरत भेजनी होगी, इसके बाद एक कमेटी अस्पताल जाकर इंजेक्शन की जरूरत की जांच करेगी। यदि जरूरत है तो इसके लिए जिला ड्रग कंट्रोलर (डीसीओ) को लिखा जाएगा। डीसीओ की अनुमति के बाद ही इंजेक्शन मिल सकेगा।
ऐसे में सवाल है कि इतनी लंबी प्रक्रिया के दौरान यदि कोई गंभीर मरीज दम तोड़ जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। क्योंकि ऑक्सीजन वितरण के लिए बनाई गई कमेटी की ओर से 27 मिनट देरी से अनुमति के चलते सात मौतों का आरोप विराट अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगाया गया था। मौतों के बाद आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी निजी अस्पतालों को दोबारा पहले की तरह ही ऑक्सीजन आपूर्ति बहाल कर दी गई थी। इसके बाद से ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं आई। ऐसे में सवाल है कि कमेटियां लोगों की जान बचाने के लिए बनाई जाती हैं या मौत होने के बाद ही समाधान की आदत बन गई है।
बुधवार को 26 डोज मिलीं, अब एक भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को 26 रेमडेसिविर की डोज मिली थीं, पांच मरीज नागरिक अस्पताल में भर्ती हैं, उनको दी गई। बाकी कहां गई, किसी को पता नहीं। क्योंकि निजी अस्पतालों में कमेटी बनाकर डोज देने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को भी स्वास्थ्य विभाग के पास 50 रेमडेसिविर की डोज पहुंचेंगी।
रेमडेसिविर पर आईएमए प्रेसिडेंट डॉ. पवन गोयल की धारणा..
रेमडेसिविर का फायदा पहले पांच दिन में होता है। यह एंटी वायरल रोधी दवाई है। इसका फायदा तभी होता है, जब वायरस की ग्रोथ हो रही होती है। आठ-नौ दिन के बाद इसका कोई फायदा नहीं है। रेमडेसिविर से मृत्यु दर में कोई कमी नहीं आती है। डब्ल्यूएचओ ने रेमडेसिविर को कोरोना की आवश्यक दवाई की सूूची से निकाल दिया है।
जितने ज्यादा बैरियर... उतना नुकसान : प्रेसिडेंट
रेवाड़ी आईएमए के प्रेसिडेंट डॉ. पवन गोयल ने कहा कि गंभीर मरीजों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए। प्रशासन की ओर से जितने बैरियर बढ़ाए जाते हैं, उससे परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार जरूरतमंद को समय पर दवाई व अन्य सामान उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इसका परिणाम पहले भी देख चुके हैं। ऐसे में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से अनुरोध है कि ऑक्सीजन व दवाओं के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होना चाहिए, ताकि समय पर लोगों की जान बचाई जा सके। निजी अस्पताल संचालक व स्वास्थ्यकर्मी पूरी जिम्मेदारी के साथ लोगों की सेवा करने में लगे हुए हैं।
वर्जन
रेमडेसिविर के लिए पहले अस्पताल में चिकित्सक की ओर से लिखी गई डोज का पर्चा जमा कराना होगा। इसके बाद कमेटी जरूरत की जांच करेगी। यदि जांच में जरूरत पाई जाती है तो डीसीओ की अप्रूवल के बाद इंजेक्शन मिल पाएगा।
- डॉ. सर्वजीत थापर, पीएमओ, नागरिक अस्पताल।