संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। खेल विभाग ने अब खेल नर्सरियों में अभ्यासरत खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य किया है। यदि खिलाड़ी हर महीने में कम से कम 22 दिन उपस्थिति दर्ज नहीं कराते हैं तो उन्हें खुराक भत्ता नहीं मिलेगा।
यह व्यवस्था खेल विभाग के अंतर्गत आने वाले खेल केंद्रों पर ही नहीं बल्कि निजी संस्थानों, पंचायतों और राजकीय विद्यालयों में संचालित खेल नर्सरियों में भी लागू की गई है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन संस्थानों को बायोमेट्रिक मशीन की खरीद और इंटरनेट की व्यवस्था खुद अपने स्तर पर करनी है।
खेल विभाग ने इसके लिए कोई अलग बजट नहीं दिया है। राजकीय विद्यालयों के नर्सरी प्रभारियों का कहना है कि बायोमेट्रिक मशीन की कीमत करीब 3 हजार रुपये है, लेकिन उनके पास इसके लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं है।
वहीं इंटरनेट की उपलब्धता न होने के कारण खिलाड़ियों की उपस्थिति दर्ज करने में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। अधिकांश प्रशिक्षकों को अपने निजी मोबाइल से इंटरनेट शेयर कर उपस्थिति दर्ज करानी पड़ रही है, जिससे अभ्यास का समय प्रभावित हो रहा है।
नर्सरी संचालक असमंजस में, समाधान की जरूरत : नर्सरी संचालकों का कहना है कि यदि समय पर बजट और तकनीकी सहायता नहीं मिली तो यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर लागू करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में खेल विभाग को चाहिए कि वह कम से कम प्रारंभिक मशीनें और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराए, ताकि बच्चों का भविष्य बाधित न हो।
खुराक भत्ता नहीं मिलने से घट रही खिलाड़ियों की रुचि
खेल विभाग ने इस वर्ष जिले में 50 खेल नर्सरियां आवंटित की थीं, जिनमें से अब केवल 34 ही सक्रिय हैं। बाकी नर्सरियां नियमित उपस्थिति न होने और समय पर खुराक भत्ता न मिलने के कारण बंद हो चुकी हैं। खिलाड़ियों को आठ से 14 वर्ष आयु वर्ग में 1500 और 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग में 2 हजार रुपये मासिक खुराक भत्ता देने का प्रावधान है लेकिन कई नर्सरियों में खिलाड़ियों को अब तक यह भत्ता नहीं मिला है। इसके चलते खिलाड़ियों की मैदान में उपस्थिति न सिर्फ कम हो रही है बल्कि उनकी अभ्यास में रुचि कम होती जा रही है।
वर्जन
अब सभी नर्सरियों में उपस्थिति केवल बायोमेट्रिक माध्यम से ही मान्य होगी। मशीन की खरीद और इंटरनेट की व्यवस्था संबंधित संस्था को खुद करनी है। विभाग की ओर से इसके लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों की उपस्थिति की निगरानी जिला और उच्च मुख्यालय स्तर पर की जाएगी। उसी आधार पर खुराक भत्ता व मानदेय दिया जाएगा।-ममता देवी, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी।