अहीरवाल का लंदन और पीतल नगरी जैसे उपनामों से पहचान रखने वाले रेवाड़ी की एक पहचान अगले कुछ सालों में खत्म हो सकती है। सरकारी उपेक्षा से हाशिये पर जा पहुंचा पीतल का काम शहर में तेजी से घट रहा है।
उपेक्षा का आलम यह है कि दो दशक पहले प्रशासन ने 5.5 एकड़ जमीन पर जो ब्रॉस मार्केट तैयार किया था, वहां ब्रॉस यानि पीतल से जुड़ी एक भी दुकान नहीं है।
कई बार बाहर से आने वाले लोग ब्रास मार्केट लैंडमार्क पर पहुंचकर भी पता नहीं कर पाते कि ब्रास मार्केट है कहां। पीतल के यहां अन्य बैंक, रेडीमेड स्टोर, कोचिंग सेंटर, होटल और मार्ट खुले हुए हैं। ऐसे में साफ है कि पीतल नगरी अपनी पहचान धीरे-धीरे कर खोती जा रही है और जल्द ही यहां का पारंपरिक काम करने खत्म हो जाऐंगे।
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92 में बने मार्केट में 250 के करीब हैं दुकानें
ब्रास मार्केट बनने से पहले करीब 5.5 एकड़ जमीन पर खेतीबाड़ी करने और अखाड़ा चलाने वाले अशोक पहलवान बताते हैं कि प्रशासन ने 1992-93 में रातों-रात जब जमीन एक्वायर की तो लोगों को बताया गया था कि जमीन पर बनने वाली मार्केट में पीतल का काम होगा। इसी आधार पर मार्केट का नाम ब्रास मार्केट रखा गया था। हुडा ने मार्केट में करीब 250 दुकानें बनाई थीं। इन दुकानों ने भविष्य में कोचिंग सेंटर, हॉस्पिटल, शॉपिंग मार्ट, बैंक, रेडीमेड के ब्रांडेड और नॉन ब्रांडेड शोरूम, बैंकों और होटलों का रूप ले लिया। लेकिन पीतल की दुकान एक भी नहीं बनी।
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चंद बड़ी कंपनियों तक सिमट कर रह गया है कारोबार
पीतल उद्योग से जुड़े लोगों की मानें व्यापार अब पीतल का व्यापार महज चंद बड़ी कंपनियों तक ही सिमट कर रह गया है। एवरेस्ट मेटल, गुप्ता मेटल, अग्रवाल समेत चंद ही बड़ी मेटल वक्र्स हैं जो बावल औद्योगिक क्षेत्र में ब्रास का काम कर रही हैं। वहीं कायस्थवाड़ा स्थित ठठेरा मोहल्ला तो चंद गलियों में ही सिमट कर रह गया है। ठठेरा समाज के प्रधान के अनुसार पहले जहां 500 से ज्यादा घरों में पीतल के बर्तन बनाने का काम होता था, वहीं पिछले दस सालों में पीतल के बर्तन बनाने वाले घरों की संख्या 150 पर सीमित होकर रह गई है।
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सीएम को ज्ञापन सौंप रख चुके हैं मांग
इस बाबत ठठेरा समाज के प्रधान श्रीगोपाल कहते हैं कि सीएम बनने के बाद मनोहर लाल खट्टर जब पहली बार आए थे तो उनका सम्मान करने के साथ ही ज्ञापन सौंपकर ठठेरा समाज और पीतल नगरी की पहचान बचाने की मांग की थी। पांच सूत्रीय मांगपत्र सीएम ने प्राप्त कर कार्रवाई का भी आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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सीएम के सामने क्या रखी थीं मांगें
- समाज को बीपीएल कोटे से प्लाट दें, क्योंकि ध्वनि प्रदूषण के बहाने लोग आए दिन परेशान करते हैं।
- समाज बीसी श्रेणी में आता है, लेकिन आज तक इस आरक्षण के तहत किसी भी सदस्य को नौकरी नहीं दी गई है।
- समाज के बच्चों की पहले स्कूलों और कॉलेजों में फीस माफी की रियायत व मासिक वजीफे थे, जो कि अब बंद हो गए हैं।
- गलत वार्ड बंदी कर समाज के लोगों को राजनीति से भी बेदखल किया गया, जिससे हमारे समाज का राजनीतिक पक्ष कमजोर हो गया।
- समाज के लिए बैंक लोन व आधुनिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, क्योंकि पुराने बर्तनों की मांग कम होने से कर्ज बढ़ता जा रहा है और नौबत आत्महत्या करने तक आ पहुंची है।
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पूर्व की सरकारों से हुई थी मांग, अब दोबारा प्रयास
ब्रास मार्केट नाम रखने और हुडा द्वारा मोटी रकम लेकर दूसरे लोगों को दुकानें देने की शिकायत पिछली सरकारों से भी की गई थी। अब वर्तमान सरकार से भी इस संबंध में बात की जाएगी। इससे विलुप्त होती जा रही पहचान बचायी जा सके।
- अरविंद यादव, अध्यक्ष, लघु उद्योग प्रकोष्ठ भाजपा