संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर मातृत्व कक्ष न होने की वजह से महिलाओं को स्तनपान करवाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जबकि मातृत्व कक्ष बनाना आवश्यक है, ताकि, स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को परेशानी न हो। लघु सचिवालय, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन पर मातृत्व कक्ष नहीं हैं। मातृत्व कक्ष न होने की वजह से महिलाएं असहज महसूस करती हैं। सरकारी कार्यालयों में मातृत्व कक्ष होना इसलिए भी जरूरी है, ताकि, महिला कर्मचारियों को किसी प्रकार की समस्या न हो।
दरअसल, नवजात को जन्म के 6 माह तक मां का दूध पिलाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में महिलाओं को बच्चों को दूध पिलाना पड़ता है। कई बार महिलाएं जरूरी कार्य के लिए घर से बाहर जाती हैं। अगर साथ में नवजात है तो महिलाओं को भीड़-भाड़ से दूर जाकर बच्चे को दूध पिलाना पड़ता है। अगर मातृत्व कक्ष होंगे तो इससे महिलाओं को होने वाली असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही आसानी से बच्चे को दूध भी पिला सकेंगी।