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हाल नागरिक अस्पताल का : न डॉक्टर बढ़े और न ही स्टाफ, मरीज परेशान

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रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल में अपने नंबर के इंतजार में बैठे मरीज - फोटो : Rewari
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कहने को तो नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के नाम पर कागजों में इसे 200 बेड का अस्पताल बना दिया गया है, पर जमीनी हकीकत में यहां सौ बेड भी पूरी नहीं हैं। यही नहीं दो सौ बेड का दर्जा देने के बाद अस्पताल में न डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई गई और न पैरा मेडिकल स्टाफ के एक भी कर्मचारी की नियुक्ति की गई है। ऐसे में अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को लंबी लाइन में ही लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
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मई माह में नागरिक अस्पताल को 200 बेड का बनाने की घोषणा हुई थी। हालात ऐसे हैं कि 100 बेड के हिसाब से भी अस्पताल में स्टाफ नर्स की भारी कमी है। जबकि स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ नर्स रीढ़ की हड्डी की तरह काम करती हैं। पूर्व में निर्धारित व्यवस्थाओं के मुताबिक 25 डॉक्टर, 64 स्टाफ नर्स व 9 नर्सिंग सिस्टर की पोस्ट चार साल से खाली पड़ी हैं। बढ़ाना तो दूर की बात है।
200 बेड के लिए जरूरी 110 डॉक्टर और 180 स्टाफ नर्स
100 बेड के हिसाब से रेवाड़ी में स्टाफ नर्स की 90 पोस्ट प्रस्तावित हैं, लेकिन कार्यरत महज 26 हैं। डॉक्टर की बात करें तो यहां पर 55 मेडिकल ऑफिसर(एमओ) की जरूरत है, लेकिन कार्यरत महज 30 ही हैं। क्योंकि अब अस्पताल 200 बेड का हो चुका है, ऐसे में स्टाफ नर्स की प्रस्तावित पोस्ट बढ़कर 180 व डॉक्टर की 110 हो जाएंगी। लेकिन ऐसा कब होगा ये बड़ा सवाल है। ऐसा ही हाल नर्सिंग सिस्टर का है। यहां पर इनके लिए 10 पोस्ट प्रस्तावित है, लेकिन कार्यरत महज दो हैं। ऐसे में 8 पोस्ट खाली होने का खामियाजा यहां पर भर्ती मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
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मच्छर जनित बीमारियों के से दो हजार के पार ओपीडी
शहर के नागरिक अस्पताल में हर रोज औसतन 1500 की ओपीडी होती है। कई बार यह संख्या बढ़ कर 2000 तक पहुंच जाती है। मलेरिया-डेंगू व अन्य मच्छर जनित बीमारियों के चलते ओपीडी औसतन 2500 तक भी पहुंच रही हैं। ऐसे में पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के चलते यहां पर भर्ती मरीजों को परेशानी का सामना पड़ रहा है।
ट्रॉमा सेंटर बना रेफरल प्वाइंट
जिला से तीन नेशनल हाईवे- 48, 11 व 71 होकर गुजरते हैं। पटौदी रोड को भी हाईवे में तब्दील करने पर कार्य चल रहा है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं के हर रोज शहर के ट्रॉमा सेंटर में 10-12 केस पहुंचते हैं। ट्रॉमा सेंटर में व्यवस्थाएं नहीं होने से हर रोज 80 फीसदी घायलों को रेफर कर दिया जाता है। इसका बड़ा कारण यह है कि आज तक ट्रॉमा सेंटर में स्थायी चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों की ड्यूटी ही ट्रॉमा सेंटर में लगाई जाती है।
प्रारूप कर रहे हैं तैयार जल्द होगा का काम शुरू : पीएमओ
नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सक डॉ. सुशील माही ने कहा कि अतिरिक्त 100 बेड के लिए नए भवन निर्माण का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। चिकित्सकों की नियुक्ति को लेकर सरकार को लिखा गया है। उम्मीद है जल्द ही डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ भी मिल जाएगा।
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