एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार नौवें दिन भी पीडब्लूडी रेस्ट हाउस के बाहर जारी रही। कर्मचारियों ने सुबह 9 बजे से सायं 4 बजे तक धरना दिया। इस धरने में एएनएम, स्टाफ नर्स, कम्प्युटर सहायक, सूचना सहायक, लेखा सहायक, ओषधाकारक, प्रयोगशाला तकनीशियन, ईएमटी, कांउसलर, चिकित्सा अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला लेखा प्रबंधक, जिला जांच एवं मूल्यांकन अधिकारी, डाटा मैनेजर, ड्राईवर, एसटीएलएस, मिनिस्ट्रीयल स्टाफ, एमपीएचई एसोसिएशन तथा आशा कार्यकर्ता शामिल हुए। धरने का संचालन जिला सचिव कृष्ण कुमार ने किया। जिसमें जिले में कार्यरत हड़ताल के दौरान प्रसूति वार्ड, लैब, एसएनसीयू तथा 102 सेवाएं प्रभावित रही।
एसोसिएशन के प्रधान हरकेश ने बताया कि 31 अक्तूबर को कर्मचारी भवन सुखपुरा चौक पर एनएचएम यूनियन की राज्य कार्यकारिणी की हड़ताल को लेकर मीटिंग चल रही थी। इस दौरान सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा कर्मचारी भवन के चारों ओर घेरा डाल कर यूनियन नेताओं को लगभग 28 घंटे तक बंद कर दिया। जोकि अलोकतांत्रिक कदम है। इस मौके पर राज्य कार्यकारिणी सदस्य संदीप यादव, एनएचएम के उप प्रधान दिलबाग सिंह, डा. पुष्पेंद्र, प्रेस सचिव विनोद राव, संतोष व सुशीला आदि ने अपने विचार व्यक्त किया। सर्व कर्मचारी संघ के केंद्रीय कमेटी सदस्य महेंद्र बोयत, जिला सचिव किरोड़ीमल सैनी, रोडवेज यूनियन के जिला प्रधान राजपाल यादव, आशा वर्कर यूनियन की जिला प्रधान सरिता देवी, सीटू के कार्यकारी राज्य प्रधान कामरेड विनोद, संयुक्त मंच के राज्य महासचिव कामरेड सूबे सिंह, मिनिस्ट्रीयल स्टाफ से अविनाश शर्मा, डॉ. सुरजीत यादव धरने में शामिल हुए।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
-सरकार द्वारा 59 बर्खास्त एनएचएम कर्मचारियों की सेवाएं बहाल करे।
-2 सितंबर 2016 को बनाई गई पालिसी के तहत सभी एनएचएम कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
-जब तक एनएचएम कर्मचारियों को पक्का करने की प्रक्रिया में समय लगता है, तब तक सभी कर्मचारियों को समान काम समान वेतन दिया जाए।