राजस्थान के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी से निकलने वाले गंदे पानी से धारूहेड़ा के लोग जहां परेशान हैं, वहीं भूजल स्तर पर भी लगातार खराब होता जा रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) की ओर से एक बार फिर भिवाड़ी प्रशासन को फटकार लगाते हुए 30 अप्रैल तक अधूरे पड़े एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) को लेकर जवाब मांगा गया है।
बता दें कि भिवाड़ी से छोड़े जा रहे दूषित एवं रसायन युक्त पानी को लेकर 2015 में उप चेयरपर्सन सुमित्रा मुकदम ने एनजीटी में केस दायर किया था। उस समय भी एनजीटी की ओर से भिवाड़ी प्रशासन को फटकार लगाई गई थी तथा कई कंपनियों पर जुर्माना भी किया गया था। वर्ष 2019 में राहुल महेश्वरी ने दूषित पानी के महेश्वरी, नगीना गार्डन व आसपास सड़कों पर हो रहे जलभराव से परेशान होकर एनजीटी में केस दायर किया था। चार फरवरी को हुई सुनवाई के चलते एनजीटी ने एसटीपी बनाने को लेकर जवाब मांगा तो प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। एनजीटी ने भिवाड़ी प्रशासन को 30 अप्रैल तक दोबारा एसटीपी के बारे में जवाब देने के आदेश दिए हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा भिवाड़ी से निकलने वाले पानी को ट्रीट करके दूसरी जगह पहुंचाने के लिए 150 करोड़ रुपये मंजूर किए हुए हैं, लेकिन भिवाड़ी प्रशासन की ओर से एसटीपी के कार्य अधर में लटके हुए हैं। कार्य पूरा नहीं होने के कारण पानी को ट्रीट नहीं किया जा रहा है और पानी धारूहेड़ा में छोड़ा जा रहा है।
धारूहेड़ा में नेशनल हाईवे से लेकर सेक्टर पार्कों में गंदे पानी का भराव
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 को जोड़ने वाली धारूहेड़ा के पॉश सेक्टर 4 व 6 की मुख्य सड़क बदहाल है। नेशनल हाईवे से लेकर ग्रीन बेल्ट व पार्कों में भिवाड़ी से निकलने वाला गंदा पानी भरा हुआ है। सालों से जमा गंदे पानी के चलते धारूहेड़ा का भूजल स्तर भी खराब हो रहा है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। धारूहेड़ा सेक्टर, भिवाड़ी व अलवर जाने वाले लोगों को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।