रेवाड़ी। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में विवरणों के सत्यापन और त्रुटियों में सुधार के लिए हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण ने नया मॉड्यूल विकसित किया है। इसके माध्यम से ग्रामीण संपत्तियों से जुड़े मामलों की जांच उपलब्ध दस्तावेज और निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद तहसीलदार निष्कर्षों के आधार पर स्पीकिंग ऑर्डर अपलोड करेंगे, जिससे निर्णय का आधार स्पष्ट रहेगा।
हरियाणा परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने बताया कि प्रदेश सरकार सरकारी रिकॉर्ड की शुद्धता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। नया मॉड्यूल ग्रामीण संपत्तियों की मैपिंग से जुड़े मामलों के व्यवस्थित निस्तारण में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि सत्यापन के दौरान यदि रिकॉर्ड में कोई त्रुटि या विसंगति सामने आती है तो उपलब्ध अभिलेखों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार सुधार किया जा सकेगा। इससे अधिकारियों को मामलों की जांच और निस्तारण में सुविधा मिलेगी।
डॉ. खोला के अनुसार, तहसीलदार जांच पूरी होने के बाद स्पीकिंग ऑर्डर अपलोड करेंगे। इसमें संबंधित मामले में लिए गए निर्णय के आधार और जांच के निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा।
आवश्यक टिप्पणियां भी रिकॉर्ड में शामिल की जा सकेंगी। इससे निर्णय प्रक्रिया का रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेगा और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता सुनिश्चित करना भी है।
ग्रामीण संपत्तियों से संबंधित मामलों में उचित जांच के बाद ही नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। इससे नागरिकों के हितों की रक्षा करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।