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सुविधाओं से लैस होगी नई जेल

Mon, 21 Nov 2016 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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 50 एकड़ 4 कैनाल जमीन पर गांव फिदेड़ी में बन रही नई जिला जेल का काम अब अपने अंतिम दौर में है। अगर सब इसी तरह से चलता रहा तो अगस्त महीने के आसपास जेल प्रशासन नई जेल को टेकओवर भी कर लेगा। नई जिला जेल में 660 अंडर ट्रायल और कैदियों को रखे जाने की व्यवस्था है जिसे बढ़ाकर 1 हजार तक किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस जेल में कैदियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पूरा ध्यान रखा जाएगा। जिसके लिए नई जेल में अस्पताल के साथ ही स्कूल और उच्च शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है।
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स्कूल में महिला कैदियों के बच्चों के साथ ही अन्य इच्छुक कैदियों को भी शिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न ओपेन कोर्स भी इग्नू समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं द्वारा कराए जाएंगे। वहीं कैदियों के रेगुलर चेकअप और उनकी बीमारियों का समय पर सही इलाज करने के लिए जेल के प्रांगण में अस्पताल की भी व्यवस्था है। कई सुविधाओं से लैस अस्पताल होने के चलते अंडर ट्रायल और कैदियों को उपचार के लिए जल्दी कहीं बाहर नहीं ले जाना पड़ेगा। इसके अलावा भी जेल में कई सुविधाएं होंगी जिससे कैदियों का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।
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जिम के साथ योग और डांस का मिलेगा ज्ञान
नई जेल में अंडर ट्रायल और कैदियों को बीमारियों से दूर रखने के लिए व्यवस्थाएं होंगी। इस कड़ी में पूरा जेल प्रांगण हरियालीयुक्त होगा। इसमें कई पेड़, पौधों के साथ ही चार से पांच पार्कों की भी व्यवस्था होगी। जेल स्टाफ, अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए पार्क तो होंगे ही साथ में बंदियों के लिए भी जेल की ऊंची दीवारों के बीच पार्क की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही जिम, डांस और योग भी बंदियों और विचाराधीन कैदियों को फिट रखने में मदद करेगा। इन सबके लिए स्पेशल ट्रेनर नियुक्त किए जाएंगे।
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स्किल डेवलपमेंट के लिए ट्रेनिंग और फैक्ट्री
बंदियों और विचाराधीन कैदियों को उनके जेल में रहने के दौरान सामाजिक के साथ ही आर्थिक स्तर पर भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। स्किल डेवलपमेंट के लिहाज से कैदियों को कंप्यूटर ट्रेनिंग, टीवी रिपेयरिंग, ऑटो मोबाइल रिपेयरिंग के साथ ही अन्य विभिन्न कोर्स भी कराए जाएंगे। इसके अलावा जेल में ही विभिन्न कुटीर और लघु उद्योगों की फैक्ट्री भी लगेंगी।
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महिलाओं के लिए स्पेशल बैरक
जेल में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें पुरुष बंदियों से बिल्कुल अलग रखा जाएगा। महिलाओं के लिए एक बैरक बनेगा, जिसकी कैपिसिटी 110 महिला बंदियों और विचाराधीन कैदियों तक होगी। इसके साथ ही दो रसोई और मेस की भी व्यवस्था की गई है। महिलाओं के लायक कुटीर उद्योगों जैसे दोना-पत्तल, रस्सी बनाने संबंधी उद्योग भी होंगे।
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74 स्टाफ क्वार्टर में रहेंगे जेल अधिकारी और एमओ
कई फुट ऊंची और चौड़ी जेल की मुख्य दीवार के बाहर और 52 एकड़ के एरिये के अंदर मुख्य दीवार से कुछ ही दूरी पर स्टाफ क्वार्टर होंगे। इनकी संख्या फिलहाल 74 बताई गई है। इनमें 2 जेल सुपरइनटेंडेंट, 4 डीएसपी, 40 वार्डन के अलावा मेडिकल ऑफिसर और अन्य डॉक्टरों के रहने की भी व्यवस्था होगी। इन स्टाफ क्वार्टर्स का निर्माण भी पूरा हो चुका है और फिनिशिंग पर काम चल रहा है।
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अभी है महज 33 की कैपिसिटी
वर्तमान में जिला जेल में विचाराधीन बंदियों और कैदियों की कैपिसिटी भविष्य में बनने वाली जेल का 20वां हिस्सा भी नहीं है। इस समय जेल की रिटन कैपिसिटी 33 है, जबकि 100 के करीब बंदी जेल में रखे हुए हैं। इसके लिए जेल के बरामदे और अन्य जगहों को भी बैरक का रूप दिया गया है।
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दिसंबर 2017 तक जेल के निर्माण का समय था। लेकिन काम की स्पीड अच्छी है और कॉन्ट्रेक्टर के मुताबिक अगस्त के आसपास वे जेल पूरी तरह तैयार कर हैंडओवर कर देंगे। यहां कैदियों के लिए अस्पताल, स्कूल के साथ ही कई स्किल डेवलपमेंट के इंतजाम होंगे।
सुखराम बिश्नोई, जेल अधीक्षक, रेवाड़ी
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निर्धारित समय तक रेवाड़ी की नई जेल का निर्माण पूरा हो जाएगा। जेलों का स्वरूप इस तरह किया जा रहा, जहां कैदी सुधरने के साथ ही कुछ सीखकर निकलें। इसके लिए आगे और भी जो अच्छे प्रयास संभव हों, किये जाएंगे।
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श्याम सिंह राणा, जेल मंत्री
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