कोसली। कोसली का पशु चिकित्सालय का भवन जर्जर अवस्था में है। करीब 30 साल पूर्व बनाए गए बकरी पालन सेंटर के भवन में यह पशु अस्पताल संचालित किया जा रहा है। इस पशु अस्पताल में 15 से अधिक गांवों के पशुओं का इलाज किया जाता हैं। इसके बावजूद भी कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी भवन की मरम्मत की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिससे यहां काम करने वाले डॉक्टर और अन्य स्टाफ हमेशा दहशत में रहते हैं। वहीं पशुओं के लिए दवा लेने आने वाले लोग भवन के बाहर ही खड़े रहते हैं। जर्जर भवन की हालत इतनी खस्ता है कि वह कभी भी गिरकर ध्वस्त हो सकता है।
बतादें कि यहां कान्हड़वास,छव्वा, भाकली बी, नठेड़ा व भाकली सहित अन्य गांवों के पशुपालक आते हैं। लेकिन कई सालों से भवन की मरम्मत नहीं हुई। हवा व पानी के चलते दवाइयां खराब हो रही हैं। जर्जर भवन में बैठ कर कर्मचारी काम करते हैं। बारिश के दिनों में यहां बैठना जोखिम से कम नहीं है। कासेली क्षेत्रमें पशुपालन लोगों की रोजी-रोटी का एक बड़ा जरिया है। बड़ी संख्या में लोग कृषि व्यवसाय के साथ पशुपालन का काम कर रहे हैं। बेजुबानों के सेहत सुधार के ढांचागत विकास पर नजर डालें तो सब कुछ सन्नाटा दिखाई देता हैं। संसाधनों की उपलब्धता का भले ही दावा किया जा रहा हो लेकिन अभी भी यहां दवाओं से लेकर अन्य सुविधाओं का अभाव है जिसके चलते पशुपालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कंडम हो चुका भवन
पशु चिकित्सालय भवन के जर्जर होने के बाद पीडब्ल्यूडी ने कंडम घोषित कर दिया है। पीडब्ल्यूडी यह मान चुका है कि भवन से कभी भी हादसा हो सकता है और इसके नीचे बैठकर काम नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद बेजुबान जानवरों का इलाज कार्यरत स्टाफ खतरे की जद में रहकर करने को मजबूर है। अब जर्जर हाल के चलते अधिकारी व कर्मचारियों में काम के दौरान हादसे का भय बना रहता है।
लगभग 30 साल पुराना है भवन
बताया जा रहा है कि पशु चिकित्सालय का यह भवन लगभग 30 साल पुराना है। यहां एक पशु चिकित्सक, एक वीएलडी एवं एक स्वीपर की स्वीकृति हैं, लेकिन यहां स्वीपर लंबे समय से नहीं है। जबकि उपमंडल स्तर पर दो वीएलडी की पोस्ट होनी जरूरी हेेती है। अस्पताल पर क्षेत्र के पशुओं के इलाज तथा टीकाकरण का जिम्मा है, लेकिन दवाओं का भी अभाव बना रहता है।
कागजों में घूम रही नए भवन की मांग
बेजुबानों के इलाज के लिए उपमंडल मुख्यालय में संचालित पशु चिकित्सालय भवन जर्जर हालत में हैं। पूंजी के बिना इनका रखरखाव करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। नए भवन के निर्माण और मरम्मत के लिए स्थानीय स्तर पर पशुपालन विभाग से पत्राचार उच्च अधिकारियों को किए गए, लेकिन भवनों की हालत अभी भी जस की तस बनी है। एक ओर जहां सरकार नित नए निर्माण कार्य करते हुए विकास को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर कासेली के पशु अस्पताल की अनदेखी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जानकारी के अनुसार यहां कई वर्षों से रंग-रोगन का कार्य तक नहीं किया गया है। आए दिन नगर और मुख्यालय के आसपास रहने वाले लोग यहां अपने पशुओं के इलाज को पहुंचते हैं। जर्जर भवन के बाहर पशुओं का इलाज होता है।
अनदेखी कुछ और ही कहानी बयां कर रही
अधिकारियों के पास कई बार भेजा जा चुका है एस्टीमेट
वर्जन
अस्पताल का भवन बेहद जर्जर है। नये भवन के लिए एस्टीमेट बनवाकर कई बार उच्च अधिकारियों के पास भेजा जा चुका है। कई बार अधिकारियों को मौखिक रूप से भी बताया जा चुका है। खुले में बैठकर पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार, प्रभारी पशु अस्पताल