मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जुलाई में हुई रेवाड़ी रैली के दौरान नगर परिषद को दस करोड़ रुपये दिए। एक वर्ष में अलग-अलग मदों से भी आठ करोड़ रुपये शहर के विकास के लिए मिले, लेकिन आपसी खींचतान में शहर का विकास नहीं हुआ। साल भर में अब तक एक ईंट नही लग पाई है।
आलम यह है कि पार्षदों के अपने स्वार्थों के चलते शहर के विकास कार्यों के अनुमोदन के लिए होने वाली हाउस की मीटिंग भी एक वर्ष में तीन बार ही हो पाई है, वह भी नप चेयरपर्सन एवं वाइस चेयरमैन को हटाने के मुद्दों के बीच शोरशराबे की ही भेंट चढ़ गई।
शुक्रवार को होने वाली हाउस की बैठक भी एक दिन पहले ही हंगामे को देखते हुए रद कर दी गई। शहर के विकास के लिए दस करोड़ सीएम घोषणा, चार करोड़ राजीव गांधी अर्बन डेवलेपमेंट, चार करोड़ सीएफसी, एसफसी एवं एससी बस्ती के लिए एक साल से नप के पास आ चुके हैं। बता दें कि 2014 से लेकर अब तक महज तीन हाउस बैठकें हुई, जो आठ दिसंबर 2014, 17 मार्च 2015 एवं 11 अगस्त, 2015 को हुई। बीते अगस्त के बाद से लेकर आज तक बैठक हुई ही नही है।
पार्षदों के निजी हितों एवं राजनैतिक कारणों से अटका शहर का विकास
शहर के इकतीस वार्डों के लिए शहरवासियों ने एक नई उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधि चुनकर नगर परिषद में भेजे थे, लेकिन एक साल पार्षदों की शिकायतों और आपसी खींचतान में गुजर गया और विकास नहीं हो पाया। शहर में बदहाल गलियों के साथ कुछ ऐसी कॉलोनियां है, जहां पर विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। नाम न छापने की शर्त पर कुछ नगर परिषद अधिकारियों ने कहा कि हाल यह है कि यहां पर कोई ठेकेदार काम लेने तक को तैयार नही है, क्योंकि पिछले चल रही सियासी खींचतान के बाद हो रही जांच से ठेकेदारों की पिछली पेमेंट तक नहीं मिल रही है।
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खेमाबंदी का खामियाजा भुगत रहे शहरवासी
प्रदेश के साथ रेवाड़ी में भी सत्ता परिवर्तन हुआ, लेकिन चेयरपर्सन कांग्रेस का होने के कारण भाजपा के एक खेमे की चेयरपर्सन बनाने के लिए मोर्चाबंदी शुरू कर दी। भाजपा के ही एक खेमे के चलते अविश्वास प्रस्ताव लाने के बावजूद सफलता नहीं मिल पाई। वहीं दूसरी ओर नप में हुए विकास कार्यों की शिकायतों पर जांच चल रही हैं। चेयरपर्सन भी अनेक जांचों के घेरे में घिरी हुई हे। डेढ़ साल में नप में तीन कार्यकारी अधिकारी भी राजनैतिक कारणों के चलते इधर से उधर किए जा चुके हैं।
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दलित बस्तियों के लिए आए पैसे के लिए नहीं है कोई योजना
नप की इंजीनियरिंग ब्रांच ने अपने लेवल पर कुछ विकास कार्यों के लिए इस्टीमेट जरूर तैयार किए हैं, लेकिन हाउस मीटिंग के इंतजार में वह भी धूल ही फांक रहे हैं। शहर की दलित बस्तियों के विकास के लिए करोड़ों रुपये नप के खाते में आ चुके हैं,लेकिन पार्षदों की लापरवाही के चलते उक्त पैसे को सुधार के लिए योजना तक नहीं बन पाई है। वहीं केंद्रीय फाइनेंस कमीशन, राज्य फाइनेंस कमीशन और राजीव गांधी अर्बन डेवलेपमेंट स्कीम के तहत भी नप के पास लगभग चार करोड़ रुपये जमा है।
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शहर के विकास कार्यों के लिए एस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। किसी भी स्थिति में विकास कार्यों को रुपये नहीं दिया जाएगा। जल्द ही हाउस की मीटिंग बुलाकर पार्षदों से चर्चा के बाद काम शुरू कर दिए जाएंगे।
- डॉ. अरविंद बाल्याण, ईओ, नगर परिषद, रेवाड़ी।
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वर्जन
कुछ पार्षदों अपने निजी हितों के चलते केवल शिकायतों में लगे हुए हैं। उन्हें शहर के विकास कार्यों से कोई लेना देना नहीं है। हमारी पूरी कोशिश है कि शहर में विकास कार्य कराएं जाएं। लोगों ने हमें यहां पर विकास कार्यों को कराने के लिए ही भेजा है।
-शकुंतला भांडोरिया, चेयरपर्सन, नप, रेवाड़ी।
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कुछ पार्षदों का काम हाउस की मीटिंग में शोर-शराबा ही करना है। उन्हें शहर के विकास से कोई मतलब नहीं है। ठेकेदारों की पेमेंट तक नहीं हो रही है, फिर विकास कैसे हो पाएगा।
-इतेंद्रपाल यादव, पार्षद, वार्ड-26
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भाजपा सरकार का उद्देशय सौ पैसे में से सौ पैसे विकास कार्याें पर खर्च करना है,लेकिन पिछली सरकार में ऐसा नहीं था। सभी पार्षद विकास कराना चाहते हैं, लेकिन कुछ नप अधिकारियों पर चल रही जांच के चलते भी विकास कार्यों में देरी हो रही है। कुछ विकास कार्यों के एस्टीमेट बनाए जा चुके हैं,जो जल्द ही शुरू कर दिए जाएंगे।
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गुरदयाल नंबरदार, पार्षद,वार्ड-12