जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय। संवाद
धारूहेड़ा। क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कनेक्शन चल रहे हैं। बास रोड पर करीब 20 से अधिक काॅलोनियां बसी हुई हैं। हर घर में पानी व सीवर का कनेक्शन है, लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद भी कनेक्शन को वैध नहीं कराया जा रहा है। कस्बे में 8 हजार से अधिक पानी के अवैध कनेक्शन हैं और 4300 कनेक्शन वैध हैं। काफी संख्या में उपभोक्ताओं की ओर से लंबे समय से पानी का बकाया बिल अदा नहीं किया गया है। विभाग की ओर से हर छह माह बाद उपभोक्ताओं को 720 रुपये पानी बिल के भेजे जाते हैं। कई उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद एक बार भी बिल नहीं भरा है।
जिले में आबादी के हिसाब से धारूहेड़ा में सबसे बड़ा पानी का स्टोरेज है। भले ही नहर का पानी पूरे महीने भी नहीं आए तो भी कस्बे में आसानी से वाटर आपूर्ति संभव है। विभाग की ओर से वाटर टैंक के साथ चार ट्यूबवेल भी हैं, जिनसे काॅलोनियों में पानी आपूर्ति की जा रही है। 2008 में नपा की स्थापना के बाद में मकानों के नक्शे पास करवाने पर लोग शिविर व पानी का कनेक्शन लेने का सिलसिला तेज हुआ। वहीं, अवैध काॅलोनियों में 60 फीसदी लोग न तो पानी और न ही सीवरेज कनेक्शन ले रहे हैं।
2.40 करोड़ बिल बकाया
विभाग की ओर से समय-समय पर बिल न भरने वाले उपभोक्ताओं को नोटिस भी भेजे जा रहे हैं, मगर बिल जमा कराने में लोग सुस्ती दिखा रहे हैं। कस्बे में नवंबर 2023 तक 2152 उपभोक्ताओं पर दो करोड़ 40 लाख 51 हजार रुपये की राशि बकाया है। अब विभाग ने दोबारा से डिफाल्टर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने की तैयारी शुरू कर दी है।
हरिनगर में है वाटर टैंक
हरिनगर में वाटर टैंक बनाया हुआ है, जहां पर नहर से आने वाले पानी को ट्रीट करके धारूहेड़ा में आपूर्ति किया जा रहा है। पिछले दो साल में महज एक हजार ही नए कनेक्शन हुए, जबकि बिल नहीं भरने की वालों की संख्या करीब 2152 है। सबसे अहम बात यह है कि बार-बार नोटिस जारी करने और चेतावनी के बावजूद डिफाल्टरों को कोई भय ही नहीं है।
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वर्जन:
पानी का बिल नहीं भरने वाले उपभोक्ताओं का कनेक्शन काटा जाएगा। साथ ही नोटिस भी दिया जा रहा है।
- मुकेश शर्मा, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग धारूहेड़ा