रेवाड़ी। औद्योगिक कस्बा धारूहेड़ा और बावल में बड़ी संख्या में कंपनियां होने के बावजूद यहां पर ईएसआई अस्पताल नहीं है। बावल और धारूहेड़ा में 50 हजार से अधिक कर्मचारी ईएसआई चुका रहे हैं। धारूहेड़ा में अस्पताल के नाम पर एक डिस्पेंसरी चल रही है जहां पर केवल काम चलाऊ काम होता है।
गंभीर मरीजों को मानेसर या गुरुग्राम में रेफर किया जाता है। बावल में ईएसआई अस्पताल के नाम पर क्लीनिक चल रहा है और यह क्लीनिक किराए के भवन में चलता है। ऐसे में यहां के मरीजों को रेफर किया जाता है। अभी बावल में नया ईएसआई अस्पताल बन रहा है। मगर अभी तक भवन तैयार नहीं हो पाया है।
अगर अस्पताल खुलता है तो कर्मचारियों को काफी राहत मिल सकती है। मौजूदा समय में कर्मचारियों को छोटी परेशानियों को लेकर दूर जाना पड़ता है। ऐसे में कर्मचारी यही सोचते हैं कि दूर जाने से अच्छा जिले में निजी अस्पताल में अपना इलाज करवा लें।
70 करोड़ रुपये से हो रहा ईएसआई अस्पताल तैयार
लंबे समय से बावल में ईएसआई अस्पताल के निर्माण की मांग की जा रही है। बावल में 2019 में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण की घोषणा की गई थी। 70 करोड़ रुपये का बजट मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इस साल अस्पताल निर्माण पूरा होने से श्रमिकों को चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
धारूहेड़ा में डिस्पेंसरी में गंभीर समस्याओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। कभी कभी तो डाॅक्टर ही नहीं मिलते। हमें इलाज के लिए मानेसर जाना होता है। इमरजेंसी में प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। सरकार को यहां पर अस्पताल बनवाने की आवश्यकता है। -गुड्डू कुमार, धारूहेड़ा
वेतन से हर महीने कुछ राशि सेहत सुविधाओं की गारंटी के नाम काटी जाती है लेकिन डिस्पेंसरी में केवल सर्दी, खांसी, जुकाम की दवाई मिलती है। यदि किसी कर्मचारी को कोई जांच करवानी हो तो है उसके लिए बाहर जाकर बजार में अपनी जेब से पैसे देने पड़ते हैं। यदि वह देने में सक्षम नहीं है तो धारूहेड़ा से पच्चीस किलोमीटर मानेसर ईएसआई अस्पताल में जाकर चक्कर काटना पड़ता है फिर रिपोर्ट मिलती है। -जीतन कुमार, धारूहेड़ा
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अस्पताल न होने की स्थिति में पच्चीस किलोमीटर दूर मानेसर जाकर इलाज करवाने में काफी परेशानी होती है। यहां अस्पताल बनाए जाने की आवश्यकता है। -दीनेश कुमार, धारूहेड़ा
गुड्डू कुमार, धारूहेड़ा
गुड्डू कुमार, धारूहेड़ा