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24 से ज्यादा भवन जर्जर...इनके पास से संभल कर गुजरें

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जर्जर अवस्था में मुक्ति हवेली। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। बरसात का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में जिले में 24 से ज्यादा जर्जर भवन मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इस ओर संबंधित अधिकारी ध्यान तक नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि भवनों के रखरखाव की जिम्मेदारी उनके स्वामियों और विभाग का है। मजे की बात है कि अभी तक जर्जर भवनों को लेकर विभागीय तौर पर काफी दिनों से कोई सर्वेक्षण तक नहीं किया गया है। शायद अधिकारी किसी बड़ी घटना के इंतजार में हैं।
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मामले में अगर बात जिला मुख्यालय की करें तो यहां मुक्ति हवेली बहुत पुरानी है। यह काफी समय पहले ही जर्जर घोषित की चुकी है। इसकी दीवारों पर चेतावनी पट भी लगाए गए हैं। साथ ही इससे दूर होकर निकलने की बात कही गई है। इस हवेली के आसपास हजारों लोग आबाद हैं। बारिश के दौरान हवेली का कोई भी हिस्सा गिरता है तो इससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।
उधर, जिला मुख्यालय पर परिवहन विभाग का बस अड्डा भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। मगर यहां से आज भी बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। यहां लगभग रोजाना हजारों यात्रियों का जमावड़ा रहता है। कई बार इस भवन की छत का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है, मगर परिवहन विभाग और अधिकारी बेखबर हैं। बारिश में सीलन की वजह से जर्जर छतों से टूटता प्लास्टर आम प्रक्रिया है।
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नाहड़ पुलिस चौकी का भवन भी हो चुका है जर्जर
इनके अलावा शहर के मोहल्ला चौधरीवाड़ा, कायस्थवाड़ा, खासापुरा, जैनपुरी, पुरानी तहसील के पास, स्वामीवाड़ा, बल्लूवाड़ा, गुर्जरवाड़ा, बास सिताबराय के अलावा बाहरी हिस्सों में भी ऐसी कई जर्जर भवन हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। उधर खंड मुख्यालय नाहड़ में पुराने बीडीपीओ आफिस में संचालित तहसील भवन, पुराने किले में संचालित नाहड़ पुलिस चौकी भी जर्जर भवनों की श्रेणी में शामिल हैं।
जर्जर भवन के चलते राजकीय उच्च विद्यालय के बच्चों को किया गया स्थानांतरित
कस्बा बावल में राजकीय उच्च विद्यालय सराय का भवन जर्जर होने की वजह से कुछ दिन पहले ही एसडीएम बावल के आदेश पर खाली कराकर वहां अध्ययनरत बच्चों को दो अलग-अलग विद्यालयों में स्थानांतरित कर दिया गया। अब इस विद्यालय पर ताला लगा दिया गया है। इसी वजह से इस भवन में बावल नगर पालिका के चेयरमैन और नगर पार्षद चुनाव के लिए मतदान कराने से पूर्व मौका निरीक्षण के बाद यहां से तीन मतदान केंद्रों को दूसरी जगह बदल दिया गया।
बावल के किले का दरवाजा भी हो चुका है जर्जर
बावल स्थित किले का दरवाजा भी जर्जर हो चुका है, मगर पुरातत्व महत्व का दरवाजा बताए जाने के बाद इसको नगर पालिका नहीं गिरवा सकी है। यह दरवाजा, जिस जगह है, उसके ठीक सामने दुकानें बनी हुई हैं, जबकि इसके सामने से एक सड़क उपमंडल अदालत परिसर की ओर जाता है। इनके अलावा इस कस्बे के कटला बाजार और मोहल्ला हसनपुरा में मस्जिद जर्जर अवस्था में हैं। इनके अलावा जाटूसाना और खोल खंड में भी काफी ऐसी इमारतें हैं, जो जर्जर अवस्था में हैं, जिनको बने हुए कई दशक बीत चुके हैं मगर इनकी वजह से कोई हादसा कब मानवीय जान ले लेगा, यह कोई नहीं जानता।
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अधिकारिक पक्ष - 1
- निजी भवनों के रख-रखाव की जिम्मेदारी उनके मालिकों की होती है। सरकारी भवन बनाने के बाद संबंधित विभाग को हस्तानांतरित कर दिए जाते हैं। इसके बाद उनकी देखभाल संबंधित विभाग करता है। लोक निर्माण विभाग केवल अपने भवनों की देखरेख करता है। जर्जर भवनों को लेकर विभागीय तौर पर काफी दिनों से कोई सर्वेक्षण तो नहीं हुआ, मगर इनको जर्जर घोषित करने के लिए उनकी मौजूदा स्थिति और निर्माण समयावधि दोनों देखी जाती है और उसके बाद निर्णय लिया जाता है। - आदित्य देशवाल अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग।
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- अधिकारिक पक्ष 2
नाहड़ की पुलिस चौकी का भवन जर्जर है तो पुलिस विभाग नया भवन बनाने के लिए अगर जमीन की मांग करता है तो डीडीपीओ कार्यालय से इस संबंध में सरकार को जमीन देने का प्रस्ताव भेजा सकता है। हमारा विभाग केवल शिक्षण संस्था, जनस्वास्थ्य विभाग व स्वास्थ्य विभाग को जमीन निशुल्क उपलब्ध कराता है। इनके अलावा सभी विभागों को जमीन देने के लिए सरकार की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जहां तक जर्जर भवनों का मामला है तो किसी सरकारी या गैर सरकारी भवन को जर्जर घोषित करने के लिए लोक निर्माण विभाग की राय ली जाती है और उसकी आधार पर अगली कार्यवाही की जाती है।
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- हरिप्रकाश बंसल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी।
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